केंद्रीय बजट 2026 की घोषणा 1 फरवरी को होने वाली है और इस बार सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी को लेकर उद्योग जगत में खासी उत्सुकता बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में कुछ राहत दे सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। घरेलू बाजार में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ कस्टम ड्यूटी पर भी निर्भर करती हैं।
निवेशकों के लिए अवसर
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बजट में कस्टम ड्यूटी में कमी की जाती है तो निवेशकों को फायदा हो सकता है। घरेलू बाजार में सोने की कीमतें कम होने से खरीदारी बढ़ सकती है।
ज्वैलरी उद्योग भी इस बार के बजट से काफी उम्मीदें लगाए बैठा है। कारोबारियों की मांग है कि आयात शुल्क में कटौती की जाए ताकि घरेलू उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
बाजार में चर्चा
बाजार सूत्रों के अनुसार सरकार कीमती धातुओं पर नीति में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर सकती है। इससे आयात-निर्यात दोनों पर असर पड़ेगा।
ज्वैलरी निर्माताओं का कहना है कि मौजूदा कस्टम ड्यूटी ढांचे में सुधार की जरूरत है। उनका मानना है कि इससे घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
आर्थिक प्रभाव
अर्थशास्त्रियों का विचार है कि सोने-चांदी पर कर व्यवस्था में बदलाव से समग्र अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। भारत सोने का बड़ा आयातक देश है और इस पर नीति का सीधा प्रभाव व्यापार संतुलन पर पड़ता है।
उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि वित्त मंत्री बजट भाषण में कीमती धातुओं के बारे में क्या घोषणा करते हैं। बाजार में अनुमान लगाए जा रहे हैं कि कस्टम ड्यूटी में 2 से 3 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बजट की घोषणा का इंतजार करें और उसके बाद ही निवेश के फैसले लें। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के बाद सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।