मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में चार दिनों तक चले चिकित्सा तकनीक और ज्ञान के महाकुंभ USICON 2026 का रविवार को औपचारिक समापन हो गया। सम्मेलन का अंतिम दिन पूरी तरह से स्वास्थ्य, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को समर्पित रहा। इस समापन समारोह का सबसे मुख्य आकर्षण ‘पास द बैटन ऑफ लाइफ’ थीम पर आधारित एक विशाल मैराथन रही। इसमें देश-विदेश से आए यूरोलॉजिस्ट्स ने दौड़ लगाकर अंगदान का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
01 फरवरी 2026 की सुबह इंदौर की प्रमुख सड़कों पर एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। जब शहर की ठंडी हवाओं के बीच सैकड़ों डॉक्टर, मेडिकल छात्र और स्थानीय नागरिक मैराथन ट्रैक पर उतरे, तो यह केवल एक दौड़ नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में एक बड़ा सामाजिक कदम बन गई। विशेषज्ञों ने सफेद कोट उतारकर रनिंग शूज पहने और यह संदेश दिया कि एक डॉक्टर न केवल अस्पताल में जीवन बचाता है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने का काम भी करता है।
अंगदान के प्रति जागरूकता का बड़ा संदेश
मैराथन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को अंगदान के महत्व के बारे में शिक्षित करना था। आयोजन समिति के अनुसार, एक व्यक्ति द्वारा किया गया अंगदान कई जिंदगियां बचा सकता है। इस दौड़ में शामिल युवा रेजिडेंट्स और वरिष्ठ विशेषज्ञों ने कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया। प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बनता था, विशेष रूप से जब अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी ने भी स्थानीय नागरिकों के साथ कदम से कदम मिलाया। आयोजन समिति ने स्पष्ट किया कि फिटनेस ही असली दवा है और इसी सोच को घर-घर तक पहुंचाना इस मैराथन का लक्ष्य था।
“हम चाहते थे कि USICON का समापन समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश के साथ हो। मैराथन और ऑर्गन डोनेशन अभियान इसी सोच का हिस्सा है। डॉक्टर केवल अस्पतालों तक सीमित न रहें, बल्कि वे समाज में हेल्थ अवेयरनेस के ब्रांड एंबेसडर बनें।” — डॉ. सुशील भाटिया, ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी
अकादमिक और तकनीकी उपलब्धियां
सम्मेलन के पिछले तीन दिन पूरी तरह से वैज्ञानिक सत्रों, लाइव सर्जरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित चर्चाओं के नाम रहे थे। समापन के दिन भी शैक्षणिक गतिविधियां थमी नहीं। विभिन्न केंद्रों पर यूरोपियन बोर्ड एग्जाम और विशेषज्ञता मूल्यांकन सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में युवा डॉक्टरों ने अपनी कुशलता का प्रदर्शन किया और वरिष्ठ विशेषज्ञों से भविष्य की चिकित्सा चुनौतियों के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया।
इस चार दिवसीय आयोजन के दौरान 2000 से अधिक डेलीगेट्स और 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी ने हिस्सा लिया। इंदौर को वैश्विक मेडिकल मैप पर मजबूती से स्थापित करने वाले इस सम्मेलन में रोबोटिक सर्जरी, लेजर तकनीक और AI आधारित उपचार पद्धतियों पर गहन मंथन हुआ। सम्मेलन को केवल एक अकादमिक बैठक तक सीमित न रखते हुए इसे ‘हेल्थ फेस्टिवल’ का रूप दिया गया, जिसमें साइक्लोथॉन, हेरिटेज वॉक और सांस्कृतिक संध्याएं भी शामिल थीं।
इंदौर: उभरता हुआ मेडिकल हब
आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ. संजय शिंदे ने कहा कि यह चार दिन केवल चिकित्सा चर्चा के लिए नहीं थे, बल्कि यह जीवनशैली में सुधार का एक व्यापक अभियान था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि लोग नियमित जांच कराएं और अंगदान जैसे पुनीत कार्यों में हिस्सा लें, तो स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी क्रांति आ सकती है।
“इंदौर ने जिस तरह इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी की है, वह गर्व का विषय है। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और मेहमाननवाजी ने सभी का दिल जीत लिया है। हमें विश्वास है कि आने वाले समय में इंदौर मेडिकल टूरिज्म और उच्च स्वास्थ्य शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।” — डॉ. नितीश पाटीदार, ऑर्गनाइजिंग कमेटी ट्रेज़रर
को-ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. रवि नागर ने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन में सीखी गई आधुनिक तकनीकें अब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर इलाज पहुंचाने में सेतु का काम करेंगी। वहीं, को-ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल ने आम जनता से अपील की कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और यूरोलॉजी से जुड़ी किसी भी समस्या के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। निष्कर्षतः, USICON 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंदौर अब केवल स्वच्छता ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, विज्ञान और मानवता के क्षेत्र में भी देश का नेतृत्व कर रहा है।