नई जंग पर ईरान का अलर्ट, अमेरिका को क्षेत्रीय टकराव का खतरा बताया

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई ने अमेरिका को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि यदि वाशिंगटन ने नया युद्ध शुरू किया, तो वह केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान की दिशा में युद्धपोत भेजे जाने की खबरें सामने आई हैं। खामेनेई ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को इसके गंभीर नतीजों के लिए तैयार रहना होगा।

फज्र दशक समारोह में दिया बयान

खामेनेई ने यह चेतावनी 1 फरवरी को एक बड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए दी। यह कार्यक्रम इमाम खुमैनी की ईरान में ऐतिहासिक वापसी और इस्लामिक क्रांति की जीत की 47वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शुरू होने वाले दस दिवसीय फज्र दशक समारोह का हिस्सा था। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इस बार युद्ध की शुरुआत करता है, तो यह सीधे तौर पर एक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह उसी की होगी।

हालिया प्रदर्शनों को बताया तख्तापलट जैसा

अपने भाषण में खामेनेई ने हाल के विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन सामान्य असंतोष नहीं, बल्कि तख्तापलट जैसी कोशिश थे, जिन्हें समय रहते दबा दिया गया। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थानों, सरकारी कार्यालयों, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की सुविधाओं, बैंकों और मस्जिदों को निशाना बनाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान कुरान की प्रतियां जलाने जैसी घटनाएं भी हुईं।

आर्थिक असंतोष से राजनीतिक चुनौती तक

ये विरोध प्रदर्शन दिसंबर के अंत में ईरान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और मुद्रा के लगातार गिरने के कारण शुरू हुए थे। धीरे-धीरे यह असंतोष सरकार और देश के राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ खुली चुनौती में बदल गया। हालांकि खामेनेई ने पहले कुछ आर्थिक शिकायतों को जायज माना था, लेकिन उनके हालिया बयान यह संकेत देते हैं कि अब सरकार इन आंदोलनों को लेकर ज्यादा सख्त रवैया अपना रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन घटनाओं के बाद हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है।

फांसी की सजाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता

ईरान में देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों में मौत की सजा का प्रावधान है। ऐसे में हालिया कार्रवाई के बाद बड़े पैमाने पर फांसी की सजा दिए जाने की आशंका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मौजूदा हालात में सख्त कानूनी कदमों से स्थिति और बिगड़ सकती है, जबकि ईरान का नेतृत्व इसे देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए जरूरी बता रहा है।