Bidi vs Cigarette: ज्यादा नुकसानदेह होने के बावजूद बीड़ी क्यों है सस्ती? रिपोर्ट्स में चौंकाने वाली वजहें

केंद्रीय बजट 2025-26 में तंबाकू उत्पादों पर टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने सिगरेट पर कर बढ़ा दिया है जबकि बीड़ी पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाया गया।

इस फैसले से बाजार में सिगरेट की कीमतें बढ़ेंगी। वहीं बीड़ी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। यह कदम कई लोगों को हैरान कर रहा है।

सरकार का तर्क क्या है

सरकार के अनुसार बीड़ी उद्योग से करोड़ों गरीब मजदूर जुड़े हैं। इनमें बड़ी संख्या महिला कामगारों की है। बीड़ी पर टैक्स बढ़ाने से इन लोगों की आजीविका प्रभावित होती।

बीड़ी बनाने का काम ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में होता है। यह असंगठित क्षेत्र का हिस्सा है। सरकार इस वर्ग को आर्थिक झटका नहीं देना चाहती।

सिगरेट पर टैक्स क्यों बढ़ा

सिगरेट को लक्जरी उत्पाद माना जाता है। इसका उपभोग मुख्य रूप से शहरी और मध्यम वर्ग करता है। सरकार का मानना है कि यह वर्ग अधिक कर देने में सक्षम है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट पर टैक्स बढ़ाने से खपत कम होती है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।

आंकड़ों की बात

भारत में बीड़ी उद्योग में लगभग 4 करोड़ से अधिक लोग काम करते हैं। इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं हैं। यह देश के सबसे बड़े असंगठित क्षेत्रों में से एक है।

सिगरेट उद्योग संगठित क्षेत्र में आता है। बड़ी कंपनियां इसका उत्पादन करती हैं। इस पर टैक्स वसूलना आसान और पारदर्शी है।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह फैसला सामाजिक न्याय की दृष्टि से सही है। गरीब तबके पर टैक्स का बोझ कम रखना जरूरी है।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि बीड़ी भी उतनी ही हानिकारक है जितनी सिगरेट। दोनों पर समान नीति होनी चाहिए।

राजनीतिक पहलू

बीड़ी श्रमिक वोट बैंक का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कई राज्यों में इनकी संख्या लाखों में है। चुनावी गणित में यह वर्ग अहम भूमिका निभाता है।

विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य के मामले में दोहरी नीति नहीं होनी चाहिए।

उपभोक्ताओं पर असर

सिगरेट पीने वालों को अब जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। प्रति पैकेट कीमत में इजाफा होगा। यह बढ़ोतरी ब्रांड के हिसाब से अलग होगी।

बीड़ी उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत है। उनके लिए कीमतें पहले जैसी ही रहेंगी।

स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू से हर साल लाखों मौतें होती हैं। भारत में यह संख्या 13 लाख से अधिक है। बीड़ी और सिगरेट दोनों इसमें शामिल हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि बीड़ी में फिल्टर नहीं होता। इससे धुआं सीधे फेफड़ों में जाता है। यह सिगरेट से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है।

आगे क्या होगा

सरकार भविष्य में तंबाकू नियंत्रण पर व्यापक नीति ला सकती है। फिलहाल यह फैसला आर्थिक और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया है।

बजट सत्र में इस मुद्दे पर बहस होने की संभावना है। विपक्ष और स्वास्थ्य संगठन अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों की नजर अब सरकार की अगली चाल पर है। तंबाकू नीति में बदलाव का असर दूरगामी होगा।