EPFO न्यूनतम पेंशन ₹7,500 करने पर मोदी सरकार का जवाब, कोई समयसीमा तय नहीं

संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर EPFO की न्यूनतम पेंशन का मुद्दा उठा। महाराष्ट्र से भाजपा सांसद डॉ. मेधा विष्णु कुलकर्णी ने राज्यसभा में EPS-95 पेंशनर्स की समस्याओं को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने पर विचार कर रही है।

इस सवाल के जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में न्यूनतम EPS पेंशन बढ़ाने का कोई अलग प्रस्ताव नहीं है। इसके लिए कोई समयसीमा भी तय नहीं की गई है।

सांसद ने उठाए थे कई अहम सवाल

डॉ. मेधा कुलकर्णी ने सरकार से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा था। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार को महाराष्ट्र के लाखों पेंशनभोगियों की मांगों की जानकारी है। साथ ही उन्होंने जानना चाहा कि कर्मचारी यूनियनों के ज्ञापनों पर क्या कार्रवाई हुई।

सांसद ने यह भी पूछा कि क्या महाराष्ट्र के पेंशनर्स के लिए कोई एक्चुअरियल स्टडी की गई है। उन्होंने फंड की व्यवहार्यता के मूल्यांकन पर भी सवाल उठाया। पेंशन संशोधन की प्रस्तावित समयसीमा के बारे में भी जानकारी मांगी गई।

सरकार का विस्तृत जवाब

मंत्री शोभा करंदलाजे ने लिखित जवाब में योजना की पूरी संरचना समझाई। उन्होंने बताया कि EPS-95 एक परिभाषित अंशदान-परिभाषित लाभ योजना है। इसमें नियोक्ता वेतन का 8.33% योगदान करता है। केंद्र सरकार ₹15,000 तक के वेतन पर 1.16% अंशदान देती है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन बजट सहायता के अतिरिक्त है। EPS-95 के पैराग्राफ 32 के तहत फंड का वार्षिक मूल्यांकन अनिवार्य है। सरकार सदस्यों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

राज्यवार फंड का कोई प्रावधान नहीं

सरकार ने एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की। EPS-95 के तहत पेंशनर्स के लिए अलग राज्यवार फंड नहीं है। महाराष्ट्र या किसी भी राज्य की मांगों पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार होता है। ट्रेड यूनियनों और जन प्रतिनिधियों से अभ्यावेदन मिलते रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार EPF योजना 1952, EPS-95 और EDLI योजनाओं पर ध्यान दे रही है। फंड की स्थिरता और भविष्य की देनदारियों को ध्यान में रखा जा रहा है।

क्या है EPS-95 योजना

कर्मचारी पेंशन योजना 1995 एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। यह रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को नियमित पेंशन देती है। इसमें नियोक्ता कर्मचारी की सैलरी का 8.33% जमा करता है। केंद्र सरकार 1.16% का योगदान करती है।

यह योगदान ₹15,000 की अधिकतम सैलरी पर कैप है। वर्तमान में लगभग 186 संस्थान इस योजना के अंतर्गत आते हैं। करीब 80 लाख पेंशनभोगी इस श्रेणी में शामिल हैं।

पेंशनर्स की लंबे समय से मांग

EPFO की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग नई नहीं है। पेंशनर्स और श्रमिक संगठन लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई में ₹1,000 बहुत कम है। इतनी राशि में सम्मानजनक जीवन जीना मुश्किल है।

विभिन्न संगठनों ने ₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग रखी है। लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। फंड की वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंताएं भी हैं।

आगे क्या होगा

सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी हितधारकों की मांगों पर विचार हो रहा है। लेकिन कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है। फंड की स्थिरता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। पेंशनर्स को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

श्रमिक संगठनों का दबाव जारी रहेगा। संसद में यह मुद्दा बार-बार उठता रहेगा। सरकार को जल्द ही कोई फैसला लेना होगा।