Good News: एमपी के 8 शहरों में दौड़ेंगी 972 ई-बसें, नई परिवहन कंपनियां संभालेंगी संचालन

मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने 8 शहरों में कुल 972 इलेक्ट्रिक बसें चलाने को हरी झंडी दे दी है। यह निर्णय प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।

भोपाल समेत 8 शहरों को मिलेगा लाभ

इस योजना के तहत राजधानी भोपाल सहित राज्य के 8 प्रमुख शहरों में ई-बसें संचालित की जाएंगी। इन शहरों में इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे शहरी परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

इलेक्ट्रिक बसों के आने से डीजल बसों पर निर्भरता कम होगी। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि ईंधन खर्च में भी बचत होगी। यात्रियों को शोर रहित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल केंद्र सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के अनुरूप है। देश भर में सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

972 ई-बसों की तैनाती से शहरों में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। बसों के संचालन के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा। विभिन्न रूटों पर इन बसों को चलाने की योजना बनाई गई है।

सार्वजनिक परिवहन होगा आधुनिक

इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक सुविधाएं होंगी। एसी, जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल पेमेंट जैसी सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी। इससे लोगों का निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन की ओर रुझान बढ़ेगा।

सरकार ने इस परियोजना के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। चरणबद्ध तरीके से इन बसों को सड़कों पर उतारा जाएगा। पहले चरण में प्रमुख रूटों पर सेवा शुरू होगी।

रोजगार के नए अवसर

इलेक्ट्रिक बस परियोजना से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। ड्राइवर, कंडक्टर और तकनीकी स्टाफ की जरूरत होगी। मेंटेनेंस और चार्जिंग स्टेशनों पर भी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।

स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर इस क्षेत्र में रोजगार दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा।

बजट और कार्यान्वयन

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया गया है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस परियोजना को वित्तीय सहायता देंगी। फेम इंडिया जैसी योजनाओं का भी लाभ लिया जाएगा।

परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विशेष समिति गठित की गई है। नगर निगम और परिवहन विभाग मिलकर काम करेंगे। निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

भविष्य की योजनाएं

मध्य प्रदेश सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में और शहरों को इस परियोजना में शामिल किया जाए। छोटे शहरों में भी इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर विचार किया जा रहा है। लक्ष्य है कि 2030 तक अधिकांश सार्वजनिक परिवहन इलेक्ट्रिक हो जाए।

यह निर्णय मध्य प्रदेश को स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाएगा। नागरिकों को प्रदूषण मुक्त और किफायती यात्रा का विकल्प मिलेगा। सरकार की यह पहल टिकाऊ विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।