हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। जब यह व्रत शनिवार को पड़ता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत में भगवान शिव के साथ शनि देव की भी पूजा की जाती है।
शनि प्रदोष व्रत का पालन करने से शनि ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाता है।
प्रदोष व्रत क्या है
प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। हर महीने में दो प्रदोष व्रत आते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। जिस दिन यह व्रत पड़ता है उसके आधार पर इसका नाम रखा जाता है।
सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष को सोम प्रदोष कहते हैं। मंगलवार को भौम प्रदोष कहा जाता है। इसी प्रकार शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं।
शनि प्रदोष व्रत का महत्व
शनि प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की पूजा होती है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। वे कर्मों के अनुसार फल देते हैं।
जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो उनके लिए यह व्रत लाभकारी है। इस व्रत से शनि दोष का निवारण होता है। जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
शनि प्रदोष व्रत 2026 की तिथियां
वर्ष 2026 में शनि प्रदोष व्रत कई बार आएगा। भक्तों को इन तिथियों का ध्यान रखना चाहिए। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। यह समय लगभग ढाई घंटे का होता है। इसी समय में पूजा करना शुभ माना जाता है।
शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
शनि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन उपवास रखें।
शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं। धूप और दीप जलाएं। शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करें।
शनि देव की भी पूजा करें। तिल के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल और उड़द का दान करें। शनि मंत्र का जाप करें।
पूजा सामग्री
शनि प्रदोष व्रत की पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है। गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से पंचामृत बनाएं। बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल रखें।
काले तिल, तिल का तेल और काले कपड़े शनि देव के लिए रखें। धूप, दीपक, कपूर और अगरबत्ती की व्यवस्था करें। प्रसाद के लिए मिठाई और फल रखें।
व्रत के नियम
शनि प्रदोष व्रत में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है। व्रत के दिन सात्विक भोजन करें। तामसिक भोजन से बचें। प्याज, लहसुन और मांसाहार का सेवन न करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें। क्रोध और झूठ से दूर रहें। मन में शुद्ध विचार रखें। दान-पुण्य करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।
शनि प्रदोष व्रत के लाभ
शनि प्रदोष व्रत करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। शनि ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
भगवान शिव की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
इस व्रत से मानसिक शांति मिलती है। तनाव और चिंता कम होती है। आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
मंत्र जाप
शनि प्रदोष व्रत के दिन विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए। शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। यह मंत्र है ओम नमः शिवाय। इसका 108 बार जाप करें।
शनि मंत्र का भी जाप करें। ओम शं शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं।
व्रत कथा का महत्व
शनि प्रदोष व्रत के दिन व्रत कथा सुनना शुभ माना जाता है। कथा सुनने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर कथा सुनें।
कथा सुनने के बाद आरती करें। प्रसाद बांटें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दान-दक्षिणा देने से पुण्य प्राप्त होता है।
सावधानियां
शनि प्रदोष व्रत करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। व्रत को पूर्ण श्रद्धा से करें। अधूरा व्रत न छोड़ें। यदि स्वास्थ्य समस्या हो तो फलाहार लें।
पूजा में किसी भी प्रकार की गलती न करें। मंत्रों का सही उच्चारण करें। पूजा के समय मन को एकाग्र रखें।