युमनाम खेमचंद बने मणिपुर के नए CM, 356 दिन बाद हटा राष्ट्रपति शासन, दो डिप्टी CM भी नियुक्त

मणिपुर में लंबे राजनीतिक गतिरोध के बाद बुधवार को नई सरकार का गठन हुआ। भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इंफाल के लोकभवन में उन्हें गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इसी के साथ राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 356 दिनों से लागू राष्ट्रपति शासन को हटाने का आदेश दिया। राज्य में एक बार फिर NDA की सरकार सत्ता में आई है।

दो समुदायों से चुने गए डिप्टी सीएम

नई सरकार में सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए दो उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए गए। लोसी दिखो नगा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक हैं।

दूसरी डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन कुकी समुदाय से आती हैं। उन्होंने दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शपथ ली। वे मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं।

क्यों लगा था राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़की थी। इस संकट के चलते 9 फरवरी 2025 को तत्कालीन सीएम एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया था।

चार दिन बाद 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। तब से राज्य केंद्र के अधीन चल रहा था।

कैसे हुआ सीएम का चयन

3 फरवरी को दिल्ली में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। इसमें युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया। अगले दिन NDA घटक दलों की बैठक में सीएम और डिप्टी सीएम के नामों पर सहमति बनी।

कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह

खेमचंद सिंग्जामेई क्षेत्र (इंफाल वेस्ट) से भाजपा विधायक हैं। 2017 से 2022 तक वे मणिपुर विधानसभा के स्पीकर रहे। 2022 में बीरेन सिंह की दूसरी सरकार में मंत्री पद संभाला।

वे मैतेई समुदाय से आते हैं। यह समुदाय मणिपुर के घाटी क्षेत्र में बहुसंख्यक है। बीरेन सिंह के करीबी माने जाते हैं लेकिन उनसे अलग मध्यमार्गी छवि रखते हैं।

मई 2023 की हिंसा के बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने कुकी बहुल इलाकों का दौरा किया। रिलीफ कैंप जाने वाले वे पहले मैतेई नेता बने। शांति प्रयासों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

नेमचा किपगेन का राजनीतिक सफर

नेमचा किपगेन 2017 और 2022 में कांगपोकपी से भाजपा विधायक चुनी गईं। यह क्षेत्र कुकी बहुल है। बीरेन सिंह के पहले कार्यकाल में वे सामाजिक कल्याण एवं सहकारिता मंत्री रहीं।

दूसरे कार्यकाल में उन्होंने वाणिज्य, उद्योग और वस्त्र विभाग संभाला। जातीय हिंसा के दौरान इंफाल में उनका सरकारी आवास जला दिया गया था।

वे उन 10 कुकी-जो विधायकों में शामिल हैं जिन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग प्रशासन की मांग की थी। उनकी नियुक्ति से कुकी समुदाय को संतुष्ट करने का प्रयास दिखता है।

गृह मंत्री पद पर चर्चा

नई सरकार में गृह मंत्री के लिए कोंथौजम गोविंदास सिंह का नाम चर्चा में है। जल्द ही पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन होने की संभावना है।

आगे की चुनौतियां

नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय सद्भाव बहाल करना है। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

खेमचंद की मध्यमार्गी छवि और दोनों समुदायों से डिप्टी सीएम की नियुक्ति संकेत देती है कि सरकार संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इसके नतीजे सामने आएंगे।