भोपाल: मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले किसानों को एक बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। सरकार ने ‘कृषक उन्नति योजना’ के तहत धान किसानों को प्रति क्विंटल ₹917 की अंतर राशि का भुगतान करने का फैसला किया है। इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों के बैंक खातों में सीधे तौर पर करीब 4500 करोड़ रुपये की राशि जमा की जाएगी।
यह कदम भारतीय जनता पार्टी द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले अपने ‘संकल्प पत्र’ में किए गए वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है। पार्टी ने किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया था।
कैसे होगी गणना और किसे मिलेगा लाभ
केंद्र सरकार द्वारा धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2183 प्रति क्विंटल तय किया गया था। अब राज्य सरकार अपने वादे के अनुसार, इन दोनों राशियों के बीच के अंतर यानी ₹917 प्रति क्विंटल का भुगतान करेगी। राज्य सरकार ने इस सीजन में किसानों से 47 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है।
सरकार के इस फैसले का सीधा लाभ उन सभी पंजीकृत किसानों को मिलेगा, जिन्होंने अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद केंद्रों पर बेची है। प्रति क्विंटल ₹917 की दर से 47 लाख मीट्रिक टन (470 लाख क्विंटल) धान पर लगभग 4300 से 4500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान किया जाएगा। यह राशि सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।
लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और किसानों की एक बड़ी आबादी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इस भुगतान के माध्यम से सरकार किसानों के बीच एक सकारात्मक संदेश देना चाहती है और अपने चुनावी वादों को पूरा करने की प्रतिबद्धता दिखाना चाहती है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पदभार संभालने के बाद से ही भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने पर जोर दिया है। किसानों को अंतर राशि का भुगतान इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या है कृषक उन्नति योजना
‘कृषक उन्नति योजना’ को विशेष रूप से किसानों को फसलों पर एमएसपी के अलावा अतिरिक्त लाभ देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है। धान पर अंतर राशि का भुगतान इसी योजना के तहत किया जा रहा है। इससे पहले भी राज्य में ‘भावांतर भुगतान योजना’ जैसी स्कीमें चलती रही हैं, जिनका मकसद किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना था।