सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित कुबरेश्वर धाम में एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की अगुवाई में रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। कुबेरेश्वर धाम में 14 फरवरी से रुद्राक्ष महोत्सव की शुरुआत, इस बार पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ ‘ग्रीन शिवरात्रि’ मनाई जाएगी।
कुबरेश्वर धाम का यह वार्षिक आयोजन देश भर के लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र होता है। हालांकि, पिछले साल हुए महोत्सव में भारी अव्यवस्था, लंबा ट्रैफिक जाम और भगदड़ जैसी स्थिति के कारण कई लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद आयोजन को बीच में ही रोकना पड़ा था। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार जिला प्रशासन और आयोजन समिति सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।
इस बार ‘हरि शिवरात्रि’ का संदेश
पंडित प्रदीप मिश्रा ने इस महोत्सव को आस्था के साथ प्रकृति से जोड़ने की एक नई पहल की है। उन्होंने सोशल मीडिया और अपनी कथाओं के माध्यम से भक्तों से ‘हरि शिवरात्रि’ मनाने की अपील की है। इसके तहत उन्होंने हर श्रद्धालु से भगवान शिव के नाम पर अपने घर, खेत या किसी भी उचित स्थान पर एक पौधा लगाने का आग्रह किया है।
उन्होंने भक्तों से यह भी कहा है कि वे अपने घर या खेत से एक लोटा जल और थोड़ी मिट्टी लेकर कुबरेश्वर धाम आएं। यहां इस मिट्टी और जल को अभिमंत्रित किया जाएगा, जिसे श्रद्धालु वापस ले जाकर अपने लगाए जाने वाले पौधे में इस्तेमाल कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य धर्म को सीधे तौर पर पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है।
लाखों श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम
इस बड़े आयोजन के लिए कुबरेश्वर धाम में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए विशाल पंडाल बनाए गए हैं। आयोजन समिति के अनुसार, भक्तों के लिए 24 घंटे भोजन की व्यवस्था (भंडारा), पीने का पानी और ठहरने के लिए अस्थाई सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण, अभिमंत्रित रुद्राक्ष का वितरण भी महोत्सव के दौरान चौबीसों घंटे जारी रहेगा, ताकि श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में इंतजार न करना पड़े और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
पिछले साल की घटना से प्रशासन सतर्क
पिछले वर्ष की दुखद घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार सीहोर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। कलेक्टर प्रवीण सिंह और एसपी मयंक अवस्थी ने खुद आयोजन स्थल का कई बार निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। प्रशासन का पूरा ध्यान ट्रैफिक मैनेजमेंट, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और आपातकालीन सेवाओं पर केंद्रित है। प्रयास किया जा रहा है कि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और पूरा आयोजन सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो। अनुमान है कि इस सात दिवसीय आयोजन में 20 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच सकते हैं।