इंदौर: देवी अहिल्या श्रमिक कामगार गृह निर्माण सहकारी संस्था में चल रही अनियमितताओं की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संस्था के प्रशासक केशव नाचण ने पूर्व सचिव कमलेश लखोटिया को एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में लखोटिया से उनके कार्यकाल, यानी 2012 से 2017 के दौरान बेचे गए सभी भूखंडों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
अयोध्यापुरी कॉलोनी लंबे समय से भूमाफियाओं की गतिविधियों और अवैध प्लॉट बिक्री के कारण विवादों में रही है। कई मूल सदस्य अपने प्लॉट का कब्जा पाने के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। लगातार शिकायतों के बाद, सहकारिता विभाग ने संस्था का नियंत्रण अपने हाथ में लेते हुए एक प्रशासक की नियुक्ति की थी, ताकि घोटालों की परतें खोली जा सकें।
प्रशासक के नोटिस का क्या है मकसद?
प्रशासक केशव नाचण द्वारा 31 मई 2024 को जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कमलेश लखोटिया अपने कार्यकाल के दौरान हुए सभी प्लॉट सौदों का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करें। इसमें संस्था के प्रस्ताव, रजिस्ट्री और अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। नोटिस में विशेष रूप से कुछ प्लॉट नंबरों (ए-71, सी-42, सी-43, सी-44, सी-45 और सी-46) का भी उल्लेख है, जिनकी अवैध तरीके से बिक्री का आरोप है।
नोटिस में लखोटिया को चेतावनी दी गई है कि यदि वे मांगी गई जानकारी प्रदान करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह कदम संस्था के पुराने रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने के लिए उठाया गया है कि किन-किन सदस्यों के प्लॉट अवैध रूप से दूसरों को बेच दिए गए।
वर्तमान अध्यक्ष और भूमाफियाओं की भूमिका
इस मामले में संस्था के वर्तमान अध्यक्ष सुरेश सिंह तोमर की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोपों के अनुसार, तोमर ने कमलेश लखोटिया, बाबूलाल बगोरा, घनश्याम पंवार, भरत सिंह चौहान और भूपेंद्र गिरि जैसे लोगों के साथ मिलकर कई प्लॉटों की अवैध बिक्री की है। प्रशासक की जांच का उद्देश्य इसी सांठगांठ को उजागर करना है।
इस घोटाले के कारण सैकड़ों पीड़ित सदस्य परेशान हैं, जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदे थे, लेकिन उन्हें आज तक कब्जा नहीं मिला। सहकारिता विभाग की यह कार्रवाई उन पीड़ितों के लिए न्याय की एक नई उम्मीद लेकर आई है। जांच से यह भी पता चलेगा कि कैसे संस्था के पदाधिकारियों ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर सदस्यों के हितों को नुकसान पहुंचाया।
कमलेश लखोटिया को भेजे गए इस नोटिस को अयोध्यापुरी भूमि घोटाले की जांच में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लखोटिया क्या जवाब देते हैं और जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है। इस कार्रवाई से इंदौर के सबसे बड़े सहकारी घोटालों में से एक का पर्दाफाश होने की संभावना है।