भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कैंसर के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। शहर के जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एवं शोध केंद्र में मध्य भारत की सबसे एडवांस रेडिएशन मशीन ‘हैल्सियॉन’ स्थापित की गई है। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत वाली यह मशीन 360-डिग्री घूमकर सीधे कैंसर कोशिकाओं पर वार करेगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया तेज और बेहद सटीक हो जाएगी।
इस अत्याधुनिक तकनीक से न केवल इलाज का समय 20 मिनट से घटकर महज 2 मिनट रह जाएगा, बल्कि स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा भी न्यूनतम होगा। अस्पताल प्रबंधन का लक्ष्य है कि इस महंगी तकनीक का लाभ गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भी कम खर्च पर मिल सके, जिससे उन्हें इलाज के लिए मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।
क्या है हैल्सियॉन 360-डिग्री रेडिएशन तकनीक?
हैल्सियॉन एक लीनियर एक्सीलरेटर मशीन है, जो कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी के लिए इस्तेमाल होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 360-डिग्री घूमकर ट्यूमर को हर एंगल से निशाना बनाना है। यह मशीन इमेज गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (IGRT) तकनीक पर काम करती है। इलाज शुरू करने से पहले यह मरीज के शरीर की सटीक इमेज लेती है, जिससे ट्यूमर की सही लोकेशन का पता चलता है। इसके बाद रेडिएशन की किरणें सिर्फ कैंसर कोशिकाओं पर ही केंद्रित होती हैं, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कोई नुकसान नहीं होता।
मरीजों को मिलेगा बड़ा फायदा, इलाज में लगेगा सिर्फ 2 मिनट
इस नई मशीन के आने से मरीजों के अनुभव में बड़ा बदलाव आएगा। अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिता अग्रवाल ने बताया कि पुरानी मशीनों से रेडिएशन देने में 15 से 20 मिनट का समय लगता था, जबकि हैल्सियॉन मशीन से यह प्रक्रिया सिर्फ डेढ़ से दो मिनट में पूरी हो जाएगी।
“यह मशीन बहुत तेज और सटीक है। इससे इलाज के दौरान साइड इफेक्ट्स जैसे त्वचा का जलना या अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बहुत कम हो जाता है। साथ ही, यह मशीन काफी शांत है, जिससे मरीज को घबराहट भी कम होती है।” — डॉ. अमिता अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक
कम समय लगने से अस्पताल में प्रतिदिन ज्यादा मरीजों का इलाज संभव हो पाएगा। इसके साथ ही अस्पताल ने अपनी क्षमता भी 300 बिस्तरों से बढ़ाकर 450 बिस्तर कर दी है, ताकि अधिक से अधिक मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा सके।
निजी अस्पतालों से कम खर्च में होगा इलाज
जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एक ट्रस्ट द्वारा संचालित होता है और इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है। अस्पताल की प्रबंध न्यासी श्रीमती तृप्ति गुढ़ा के अनुसार, इस 20 करोड़ की मशीन को बिना किसी सरकारी सहायता के ट्रस्ट के फंड से खरीदा गया है।
उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि इस先进 तकनीक का लाभ हर वर्ग के मरीज को मिले। निजी अस्पतालों की तुलना में यहां इलाज का खर्च बहुत कम रखा जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर बोझ न पड़े।
दो महीने में शुरू हो सकता है इलाज
मशीन अस्पताल पहुंच चुकी है और इसे स्थापित करने का काम तेजी से चल रहा है, जिसमें करीब एक महीने का समय लगेगा। इसके बाद परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) की टीम इसका निरीक्षण कर लाइसेंस जारी करेगी। उम्मीद है कि सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद लगभग दो महीने में इस नई मशीन से मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा।