नई दिल्ली: भगवान श्रीकृष्ण की पालक माता यशोदा का जन्मोत्सव हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इसे यशोदा जयंती के नाम से जाना जाता है। साल 2026 में यह पर्व गुरुवार, 19 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन वात्सल्य और मातृत्व का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से पूजा और व्रत करने वाली महिलाओं को संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है और उनके बच्चों का जीवन खुशहाल रहता है।
यह पर्व विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो संतान प्राप्ति की कामना करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, नंद बाबा और माता यशोदा ने भी संतान प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद उन्हें भगवान कृष्ण पुत्र के रूप में मिले। इसलिए, इस दिन माता यशोदा की पूजा का विशेष विधान है।
यशोदा जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 18 फरवरी 2026 को रात 09 बजकर 16 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन, यानी 19 फरवरी 2026 को शाम 06 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर यशोदा जयंती 19 फरवरी को ही मनाई जाएगी।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 19 फरवरी को सुबह 09 बजकर 44 मिनट से लेकर 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
यशोदा जयंती का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती का व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत करने से महिलाओं को न केवल संतान सुख मिलता है, बल्कि उनके बच्चों को अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु का वरदान भी प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि माता यशोदा की कृपा से बच्चों के जीवन से सभी संकट और कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा भी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
कैसे करें पूजा: जानें पूरी विधि
यशोदा जयंती के दिन पूजा करने की एक विशेष विधि है, जिसका पालन करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता यशोदा की गोद में बैठे बाल कृष्ण की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। पूजा का संकल्प लें और माता यशोदा को लाल चुनरी अर्पित करें। इसके बाद उन्हें कुमकुम, सिंदूर, फल, फूल, और मिठाई चढ़ाएं। भगवान कृष्ण को उनका प्रिय माखन-मिश्री का भोग अवश्य लगाएं। घी का दीपक और धूप जलाकर ‘ॐ यशोदायै नमः‘ मंत्र का जाप करें। अंत में माता यशोदा और भगवान कृष्ण की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें। इस दिन गौ सेवा का भी विशेष महत्व है, इसलिए गाय को रोटी और गुड़ खिलाना शुभ माना जाता है।