क्रिप्टो बाजार में एक बार फिर बेचैनी देखने को मिल रही है। बिटकॉइन की कीमत गिरकर करीब 69,000 डॉलर तक पहुंच गई है। लगातार दबाव में चल रहे बिटकॉइन को लेकर निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है। एक्सपर्ट्स यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि मौजूदा बिकवाली आखिर किस स्तर पर जाकर थमेगी।
स्टिफेल की चेतावनी: गिरावट अभी खत्म नहीं
अमेरिका की जानी-मानी फाइनेंशियल सर्विस कंपनी Stifel ने बिटकॉइन को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। कंपनी के एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट अभी और गहरी हो सकती है और आने वाले समय में बिटकॉइन 38,000 डॉलर तक भी फिसल सकता है।
पुराने ट्रेंड क्या संकेत देते हैं
Stifel की एनालिस्ट टीम, जिसका नेतृत्व Barry B. Bannister कर रहे हैं, ने अपने क्लाइंट्स को भेजे नोट में बताया कि बिटकॉइन पहले ही अपने ऊपरी स्तर से करीब 41% तक टूट चुका है। अगर पुराने पैटर्न को देखा जाए, तो अगला मजबूत सपोर्ट लेवल करीब 38,000 डॉलर के आसपास बनता है।
पिछली बड़ी गिरावटों से मिली चेतावनी
एनालिस्ट्स ने बिटकॉइन के पुराने क्रैश का हवाला देते हुए बताया कि
- 2011 में बिटकॉइन करीब 93% टूटा
- 2015 में 84% की गिरावट आई
- 2018 में यह 83% तक फिसला
- 2022 में करीब 76% की गिरावट दर्ज की गई
इन आंकड़ों को जोड़कर देखा जाए तो मौजूदा गिरावट का अगला संभावित पड़ाव 38,000 डॉलर के आसपास नजर आता है।
70,000 डॉलर के नीचे फिसला बिटकॉइन
अक्टूबर में जब बिटकॉइन 1,26,000 डॉलर के ऊपर पहुंचा था, तब बाजार में जबरदस्त उत्साह था। लेकिन उसके बाद कीमतों में लगातार कमजोरी आई। गुरुवार को बिटकॉइन 69,333 डॉलर तक गिर गया, जो नवंबर 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
बेंजामिन बटन फिल्म से दी गई तुलना
Stifel की टीम ने बिटकॉइन के बदले हुए व्यवहार को समझाने के लिए फिल्म The Curious Case of Benjamin Button का उदाहरण दिया। पहले ऐसा देखा जाता था कि जब डॉलर कमजोर होता था, तब बिटकॉइन मजबूत होता था। लेकिन अब यह रिश्ता उल्टा नहीं रहा।
2025 के बाद डॉलर के साथ चलने लगा बिटकॉइन
एनालिस्ट्स के अनुसार, 2025 से बिटकॉइन डॉलर के विपरीत नहीं बल्कि उसी दिशा में चलने लगा है। यह तब और हैरान करने वाला है, जब डॉलर इंडेक्स खुद कमजोरी के दौर में है। इससे बिटकॉइन की पारंपरिक पहचान पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शेयर बाजार से बढ़ता जुड़ाव
अब बिटकॉइन का रिश्ता ज्यादा Nasdaq 100 और ग्रोथ स्टॉक्स से जुड़ता नजर आ रहा है। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व नरम रुख अपनाता है, तब बिटकॉइन में तेजी आती है। वहीं, जैसे ही फेड सख्ती के संकेत देता है, बिटकॉइन दबाव में आ जाता है।
Stifel के एनालिस्ट्स का मानना है कि टेक कंपनियों पर बढ़ती उधारी लागत और शेयर बाजार में जारी कमजोरी का असर बिटकॉइन पर भी पड़ सकता है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो क्रिप्टो बाजार में आगे और गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता।