नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के सातवें संस्करण में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ संवाद किया। इस वार्षिक कार्यक्रम का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों को तनावमुक्त रहने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करना है। इस वर्ष मायगव (MyGov) पोर्टल पर रिकॉर्ड 2.26 करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए, जो इस पहल की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में परीक्षा को एक उत्सव की तरह मनाने पर जोर दिया और इसे जीवन-मरण का प्रश्न न बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परीक्षा खुद को परखने का एक मौका है, न कि अंतिम पड़ाव। कार्यक्रम में लगभग 3,000 प्रतिभागियों ने सीधे तौर पर हिस्सा लिया।
अभिभावकों को नसीहत: रिपोर्ट कार्ड को विजिटिंग कार्ड न बनाएं
इस कार्यक्रम का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रधानमंत्री का अभिभावकों के लिए संदेश था। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को अपना ‘विजिटING कार्ड’ या सोशल स्टेटस का प्रतीक न बनाएं। उन्होंने बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने और उनकी तुलना दूसरे बच्चों से करने से बचने की सलाह दी।
“कभी-कभी माता-पिता बच्चों के स्कूल में उनके प्रदर्शन को समाज में अपना स्टेटस सिंबल बना लेते हैं। बच्चों की रिपोर्ट कार्ड को अपना विजिटिंग कार्ड न बनाएं। हर बच्चे की अपनी क्षमता होती है, उसकी तुलना दूसरों से न करें।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
उन्होंने कहा कि परिवार में एक स्वस्थ और सकारात्मक माहौल बनाना जरूरी है, जिससे बच्चे बिना किसी डर के अपनी समस्याओं को साझा कर सकें।
छात्रों के लिए तनाव प्रबंधन के सूत्र
पीएम मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें और खुद पर विश्वास रखें। उन्होंने तनाव से निपटने के लिए कुछ व्यावहारिक टिप्स दिए:
1. स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा हमेशा खुद से होनी चाहिए, ताकि आप हर दिन बेहतर बन सकें। दूसरों से ईर्ष्या करने की बजाय उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
2. गलतियों से सीखें: प्रधानमंत्री ने कहा कि गलतियां सबसे होती हैं, लेकिन स्मार्ट लोग उनसे सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं। गलतियों से घबराना नहीं चाहिए।
3. संतुलन जरूरी: उन्होंने शरीर और मन को तरोताजा रखने के महत्व पर जोर दिया। जैसे एक कार को सर्विसिंग की जरूरत होती है, वैसे ही शरीर को भी पर्याप्त नींद और आराम की आवश्यकता होती है।
टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल
डिजिटल युग की चुनौतियों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों को टेक्नोलॉजी का गुलाम बनने से आगाह किया। उन्होंने सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर अत्यधिक समय बिताने के खतरों के बारे में बताया। पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि परिवार में एक ‘नो-गैजेट जोन’ बनाया जा सकता है, जहां सभी सदस्य बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के एक-दूसरे से बात करें और समय बिताएं।
शिक्षकों और स्वस्थ जीवनशैली की भूमिका
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे छात्रों के साथ सिर्फ पाठ्यक्रम तक का रिश्ता न रखें, बल्कि उनके मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बनें। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का सकारात्मक व्यवहार छात्र के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने छात्रों को संतुलित आहार लेने, पूरी नींद लेने और शारीरिक गतिविधियों में शामिल होने की सलाह दी, ताकि वे परीक्षा के दौरान ऊर्जावान और केंद्रित रह सकें।