MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इन सहायक प्राध्यापकों को मिलेगा पुरानी पेंशन का लाभ

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के सहायक प्राध्यापकों के हक में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन सहायक प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया 2017 के विज्ञापन के तहत शुरू हुई थी, वे पुरानी पेंशन योजना (OPS) के हकदार हैं, भले ही उनकी नियुक्ति 2019 में हुई हो। इस आदेश से प्रदेश के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर इन सभी शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाए। यह फैसला डॉ. आनंद कुमार शर्मा और अन्य सहायक प्राध्यापकों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है।

क्या था पूरा विवाद?

यह मामला 2017 में जारी हुए सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के विज्ञापन से जुड़ा है। इस विज्ञापन के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षकों को 2019 में नियुक्ति पत्र दिए गए। राज्य सरकार ने नियुक्ति की तारीख को आधार मानते हुए इन सभी शिक्षकों को नई पेंशन योजना (NPS) के अंतर्गत शामिल कर लिया।

इसके खिलाफ सहायक प्राध्यापकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता वृंदावन तिवारी ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन जारी होने की तारीख से ही शुरू हो जाती है, इसलिए उस समय लागू सेवा शर्तें ही मान्य होनी चाहिए।

अदालत ने सरकार की दलील खारिज की

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि चूंकि नियुक्ति 2019 में हुई है, इसलिए नई पेंशन योजना ही लागू होगी। हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी भर्ती में सेवा की शर्तें विज्ञापन जारी होने की तारीख से ही तय होती हैं। चयन प्रक्रिया एक सतत प्रक्रिया है जो विज्ञापन से शुरू होकर नियुक्ति पर समाप्त होती है। इसलिए, बाद में हुए किसी भी नियम परिवर्तन को पिछली भर्ती पर लागू नहीं किया जा सकता।

फैसले का हजारों शिक्षकों पर होगा असर

हाईकोर्ट के इस फैसले को सहायक प्राध्यापकों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय न केवल याचिकाकर्ताओं पर लागू होगा, बल्कि उन सभी सहायक प्राध्यापकों को भी इसका लाभ मिलेगा जिनकी नियुक्ति 2017 के विज्ञापन के तहत हुई थी। इस फैसले से प्रदेश के हजारों परिवारों को भविष्य की सुरक्षा मिलेगी और यह अन्य समान मामलों के लिए एक नजीर भी बनेगा। अदालत ने सरकार को तीन माह के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।