मैहर में शिक्षा विभाग में 4.37 करोड़ का घोटाला, 20 स्कूलों में फर्जी निर्माण पर BEO समेत 10 निलंबित

मैहर, मध्य प्रदेश। शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार की एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश के शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है। मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में 20 सरकारी स्कूलों में छोटे-मोटे निर्माण और मरम्मत कार्यों के नाम पर 4 करोड़ 37 लाख 89 हजार 420 रुपये का गबन किया गया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ज्यादातर काम सिर्फ कागजों पर हुए, जबकि पूरी रकम निकाल ली गई।

इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और सात स्कूलों के प्राचार्यों समेत कुल 10 अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई ने विभाग के भीतर चल रही अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ इतने बड़े घोटाले का खुलासा?

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन को रामनगर क्षेत्र के स्कूलों में लघु निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितता की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर एक जांच समिति का गठन किया गया। समिति ने जब इन 20 स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

जांच में पाया गया कि जिन कार्यों के लिए भारी-भरकम राशि जारी की गई थी, वे या तो शुरू ही नहीं हुए या फिर बेहद घटिया गुणवत्ता के थे। कई स्कूलों में मरम्मत और अतिरिक्त कमरों का निर्माण केवल फाइलों में ही पूरा हो चुका था, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। फर्जी बिल और वाउचर के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया।

इन अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज

मामले की गंभीरता को देखते हुए, संभागीय आयुक्त ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इस घोटाले में सीधे तौर पर संलिप्त पाए गए अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबित होने वालों में शामिल हैं:

  • ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO), रामनगर
  • सात विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य
  • दो अन्य संबंधित कर्मचारी

यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मामले को लेकर कितना सख्त है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले की परतें और भी खुल सकती हैं और कई अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

निलंबन के बाद अब इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, गबन की गई राशि की वसूली के लिए भी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। प्रशासनिक अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि इस घोटाले का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इसमें अन्य ब्लॉकों के अधिकारी भी शामिल हैं। इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर पुलिस जांच की भी संभावना जताई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी की कमी को उजागर कर दिया है।