इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की बेटी आकांक्षा कुटुंबले ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर तिरंगा फहराया है। आकांक्षा ने यह कीर्तिमान 21 अगस्त को स्थापित किया, जब उन्होंने कड़ाके की ठंड और तेज हवाओं का सामना करते हुए शिखर पर कदम रखा।
माउंट किलिमंजारो तंजानिया में स्थित है और इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 5,895 मीटर (19,341 फीट) है। यह दुनिया के सबसे ऊंचे एकल मुक्त-खड़े पर्वत के रूप में भी जाना जाता है। आकांक्षा का यह पहला अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान था, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा कर देश का नाम रोशन किया है।
15 अगस्त को शुरू हुआ चुनौतीपूर्ण सफर
आकांक्षा ने अपने इस चुनौतीपूर्ण अभियान की शुरुआत भारत के स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को की थी। उन्होंने बताया कि अंतिम चढ़ाई सबसे मुश्किल थी। शिखर पर पहुंचने के दौरान तापमान माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था और तेज बर्फीली हवाएं चल रही थीं, जिससे आगे बढ़ना बेहद कठिन हो गया था।
इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद, आकांक्षा ने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। आखिरकार, 21 अगस्त की सुबह उन्होंने सफलतापूर्वक शिखर पर पहुंचकर भारतीय ध्वज फहराया और देश को गौरवान्वित किया।
इंजीनियरिंग छोड़ पर्वतारोहण को चुना
इंदौर की रहने वाली आकांक्षा कुटुंबले अकादमिक रूप से भी काफी प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बी.टेक की डिग्री हासिल की है। हालांकि, पहाड़ों के प्रति उनके जुनून ने उन्हें पर्वतारोहण के क्षेत्र में खींच लिया।
अपने इस जुनून को पेशेवर रूप देने के लिए उन्होंने उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित प्रतिष्ठित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) से पर्वतारोहण का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी कौशल और मानसिक मजबूती प्रदान की, जो किलिमंजारो जैसी चोटी पर चढ़ने के लिए आवश्यक थी। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के समर्थन को दिया है।
आकांक्षा की यह सफलता इंदौर और मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह साबित करता है कि दृढ़ संकल्प और सही प्रशिक्षण के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।