नई दिल्ली/बुधनी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने गृह विधानसभा क्षेत्र बुधनी के किसानों के लिए एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने ऐलान किया कि जो किसान पारंपरिक खेती से हटकर ‘मॉडल खेती’ अपनाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से 10,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। यह घोषणा उन्होंने बुधनी में आयोजित ‘किसान सम्मान सम्मेलन’ के दौरान की।
चौहान ने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र लक्ष्य खेती को घाटे का नहीं, बल्कि लाभ का सौदा बनाना है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रहें, बल्कि खेती में नए प्रयोग करें। इस पहल का उद्देश्य किसानों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि उनकी आय में स्थायी रूप से वृद्धि हो सके।
क्या है ‘मॉडल खेती’ की अवधारणा?
शिवराज सिंह चौहान ने ‘मॉडल खेती’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। इसके तहत किसानों को कई मानकों पर काम करना होगा:
- प्राकृतिक खेती: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की जगह जैविक और प्राकृतिक तरीकों को अपनाना।
- फसल विविधीकरण: गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकलकर फल, फूल, सब्जियां और औषधीय पौधों की खेती करना।
- संबद्ध गतिविधियां: खेती के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन, रेशम कीट पालन और मधुमक्खी पालन जैसे सहायक व्यवसायों को जोड़ना।
जो किसान इन सभी मानकों को अपनाकर अपनी खेती को एक सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित करेगा, उसे ‘मॉडल कृषक’ के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
बुधनी बनेगा पूरे देश के लिए मिसाल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपने गृह क्षेत्र के लिए अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर करते हुए कहा, “हम बुधनी को कृषि के क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल बनाना चाहते हैं, जिसे देखकर पूरा देश सीखेगा। यदि बुधनी का यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।”
उन्होंने ‘लखपति दीदी’ योजना की तर्ज पर ‘लखपति कृषक’ बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया, जिसका अर्थ है कि किसान खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों से सालाना लाखों रुपये की आय अर्जित करें।
किसानों को प्रोत्साहन और सम्मान
इस योजना के तहत दी जाने वाली 10,000 रुपये की राशि एक प्रोत्साहन और सम्मान है, ताकि अन्य किसान भी इससे प्रेरणा लेकर आगे आएं। चौहान ने बुधनी के किसानों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि यहां के किसान पूरे देश के लिए एक मिसाल कायम करने की क्षमता रखते हैं। इस घोषणा से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है और माना जा रहा है कि यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारेगी, बल्कि कृषि में स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को भी बढ़ावा देगी।