आयकर विभाग ने टैक्स व्यवस्था को सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियम, 2026 सार्वजनिक कर दिए हैं। इन नियमों को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का प्रस्ताव है। सरकार का मकसद इन बदलावों के जरिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की प्रक्रिया को ज्यादा आसान और कम झंझट वाली बनाना है, ताकि आम टैक्सपेयर्स को तकनीकी और कानूनी उलझनों से राहत मिल सके।
ITR फॉर्म होंगे ज्यादा सरल और यूजर-फ्रेंडली
नए ड्राफ्ट नियमों के तहत ITR फॉर्म की संरचना को पूरी तरह से सरल किया गया है। फॉर्म की भाषा को साफ और आम लोगों के लिए समझने योग्य बनाया गया है, ताकि टैक्स भरते समय भ्रम की स्थिति न बने। इसके अलावा, कई नियमों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जैसे किसी कैपिटल एसेट को कितने समय तक होल्ड किया गया माना जाएगा, जीरो कूपन बॉन्ड से जुड़े प्रावधान और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए आवेदन प्रक्रिया।
22 फरवरी 2026 तक आम लोग दे सकेंगे सुझाव
आयकर विभाग ने इन ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म को 15 दिनों के लिए पब्लिक डोमेन में रखा है। टैक्सपेयर्स और स्टेकहोल्डर्स 22 फरवरी 2026 तक इन्हें पढ़कर अपने सुझाव दे सकते हैं। CBDT का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नियम बनाने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सहभागी बनाना है, ताकि अंतिम नियम जमीन पर ज्यादा प्रभावी साबित हो सकें।
ITR फॉर्म की पहचान बदलेगी, अब नंबर से होगी पहचान
नांगिया ग्लोबल के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला के अनुसार, नए सिस्टम में ITR फॉर्म को अब पुराने अल्फान्यूमेरिक नामों की बजाय 1 से 190 तक के सीरियल नंबर से पहचाना जाएगा। इससे टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, फॉर्म की भाषा को भी और स्पष्ट किया गया है ताकि कानूनी या प्रशासनिक भ्रम की गुंजाइश कम रहे। हालांकि, कुछ मामलों में ड्राफ्ट फॉर्म 26 में आगे संशोधन की जरूरत पड़ सकती है।
ऑटो-फिल और रिकंसीलेशन से घटेंगी गलतियां
CBDT का दावा है कि नए ITR फॉर्म टैक्सपेयर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। इनमें ऑटोमैटिक रिकंसीलेशन, प्री-फिल्ड डेटा और स्टैंडर्डाइज्ड जानकारी जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। इससे न केवल रिटर्न भरने में समय कम लगेगा, बल्कि गलतियों की संभावना भी काफी हद तक घट जाएगी।
नियमों और फॉर्म की संख्या में बड़ी कटौती
फिलहाल इनकम टैक्स नियम, 1962 के तहत 511 नियम और 399 फॉर्म लागू हैं। नए ड्राफ्ट नियमों में इन्हें काफी कम कर दिया गया है। प्रस्तावित बदलावों के बाद नियमों की संख्या घटकर 333 और फॉर्म की संख्या 190 रह जाएगी। इससे टैक्स कानूनों को समझना और उनका पालन करना आसान होगा।
पुराने और नए नियम समझने के लिए लॉन्च हुए नेविगेटर
टैक्सपेयर्स की मदद के लिए सरकार ने दो नए डिजिटल नेविगेटर भी लॉन्च किए हैं। पहला नेविगेटर पुराने और नए नियमों की तुलना दिखाता है, जबकि दूसरा पुराने और नए फॉर्म के बीच मैपिंग समझने में मदद करेगा। इससे लोगों को यह जानने में आसानी होगी कि कौन सा पुराना नियम या फॉर्म अब किस नए प्रावधान से जुड़ा है। इसके अलावा, सुझाव भी नियम और फॉर्म के अनुसार अलग-अलग दिए जा सकेंगे।