अंडरग्राउंड खुदाई की तकनीक समझने सिंगापुर-बैंकॉक जाएंगे अधिकारी, एयरपोर्ट-सुपर कॉरिडोर रूट पर रहेगा फोकस

इंदौर: शहर में चल रही मेट्रो परियोजना अब अपने सबसे जटिल और महत्वपूर्ण चरण की तैयारी में है। एलिवेटेड कॉरिडोर पर तेजी से काम के बाद अब 16 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से के निर्माण की बारी है। इस काम में आने वाली तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम जल्द ही सिंगापुर और बैंकॉक का दौरा करेगी।

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भूमिगत खुदाई और टनल निर्माण की उन आधुनिक तकनीकों का अध्ययन करना है, जिनका इस्तेमाल इन देशों में सफलतापूर्वक किया गया है। टीम यह देखेगी कि घनी आबादी और संवेदनशील इलाकों में अंडरग्राउंड मेट्रो का निर्माण कैसे किया जाता है, ताकि इंदौर प्रोजेक्ट में किसी तरह की कोई बाधा न आए।

एयरपोर्ट से सुपर कॉरिडोर रूट सबसे बड़ी चुनौती

मेट्रो का प्रस्तावित भूमिगत हिस्सा एयरपोर्ट से शुरू होकर सुपर कॉरिडोर तक जाएगा। यह मार्ग तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह एयरपोर्ट रनवे के नीचे से सुरंग बनाना है। इसके अलावा, यह रूट शहर के पुराने और सघन बसे इलाकों से भी होकर गुजरेगा, जहां निर्माण कार्य करना आसान नहीं होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इंदौर की जमीन में कठोर चट्टानें हैं, जिन्हें काटने के लिए विशेष और शक्तिशाली मशीनों की जरूरत होगी। इस काम के लिए आमतौर पर टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जाता है, जो जमीन के नीचे धीरे-धीरे सुरंग खोदती है।

क्यों चुना गया सिंगापुर और बैंकॉक?

सिंगापुर और बैंकॉक को अध्ययन के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि दोनों शहरों ने जटिल शहरी वातावरण में अंडरग्राउंड मेट्रो नेटवर्क का सफलतापूर्वक निर्माण किया है। वहां की भौगोलिक और शहरी परिस्थितियां इंदौर से काफी मिलती-जुलती हैं। अधिकारियों की टीम वहां उपयोग की जा रही मशीनों, सुरक्षा मानकों और निर्माण के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन की बारीकियों को समझेगी।

इस दौरे पर जाने वाली टीम का नेतृत्व एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक (MD) मनीष सिंह करेंगे। उनके साथ प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।

टेंडर प्रक्रिया से पहले अहम दौरा

यह स्टडी टूर भूमिगत सेक्शन के लिए टेंडर जारी करने से ठीक पहले हो रहा है। इस दौरे से मिले अनुभवों और तकनीकी जानकारी का उपयोग टेंडर के दस्तावेजों को और बेहतर बनाने में किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रोजेक्ट के लिए ऐसी कंपनियां आगे आएं, जिनके पास इस तरह के जटिल काम का अनुभव और सही तकनीक हो।

अधिकारियों के अनुसार, भूमिगत हिस्से के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में लगभग छह महीने लग सकते हैं। उम्मीद है कि मानसून के बाद इस पर जमीनी काम शुरू हो जाएगा। यह दौरा इंदौर मेट्रो को अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ सुरक्षित और समय पर पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।