ऐतिहासिक जनादेश के साथ जीतीं PM ताकाइची, LDP ने बहुमत किया हासिल, मोदी ने दी बधाई

जापान के आम चुनावों में प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। मतदान खत्म होने के महज दो घंटे के भीतर ही उनके नेतृत्व वाले गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने इस चुनाव में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसे पार्टी के अब तक के सर्वश्रेष्ठ नतीजों में गिना जा रहा है। शुरुआती रुझानों ने ही यह साफ कर दिया था कि ताकाइची की लहर ने विपक्ष को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया है।

बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार, विपक्ष बिखरा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतिनिधि सभा की कुल 465 सीटों में से बहुमत के लिए 233 सीटों की जरूरत थी, जिसे एलडीपी ने बेहद आसानी से हासिल कर लिया। 64 वर्षीय प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के नेतृत्व में पार्टी को 312 सीटें मिली हैं, जो जरूरी आंकड़े से कहीं ज्यादा हैं। अभी भी कई सीटों पर मतगणना जारी है और उनमें भी एलडीपी बढ़त बनाए हुए है, जबकि विपक्षी दल अब तक केवल 68 सीटों पर ही सिमटते नजर आ रहे हैं।

वैश्विक नेताओं ने दी जीत की बधाई

ताकाइची की इस शानदार जीत पर दुनियाभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें जीत की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है और ताकाइची के नेतृत्व में यह दोस्ती और मजबूत होगी।

गौरतलब है कि सनाए ताकाइची ने अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। उस समय विपक्ष ने उनके खिलाफ कड़ा विरोध शुरू कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताकाइची व्यक्तिगत रूप से जनता के बीच काफी लोकप्रिय थीं, जबकि उनकी पार्टी को लेकर उतना उत्साह नहीं था। इसी स्थिति को भांपते हुए उन्होंने अचानक चुनाव कराने का फैसला लिया, जो अब पूरी तरह सही साबित हुआ है।

भावुक अपील ने बदला चुनाव का रुख

चुनाव प्रचार के दौरान ताकाइची ने एक बड़ा और भावनात्मक दांव खेला था। उन्होंने साफ कहा था कि अगर उनकी पार्टी और गठबंधन को बहुमत नहीं मिला, तो वह प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगी। उनकी इस अपील का जापानी जनता पर गहरा असर पड़ा। मतदाताओं ने इसे नेतृत्व की ईमानदारी और जिम्मेदारी के रूप में देखा और उन्हें भारी समर्थन दिया। जापानी मीडिया का मानना है कि विपक्ष इस भावुक अपील का कोई जवाब नहीं ढूंढ पाया, जिससे उसे करारी हार झेलनी पड़ी।

चीन को लेकर सख्त रुख, अमेरिका से मजबूत रिश्ते प्राथमिकता

आने वाले कार्यकाल में सनाए ताकाइची के सामने चीन सबसे बड़ी चुनौती के रूप में रहेगा। वह चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जापान की आर्थिक स्थिति और सैन्य ताकत को मजबूत करने वाली दक्षिणपंथी नीतियों को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। साथ ही, अमेरिका के साथ रणनीतिक गठबंधन को और मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। चुनावी रैलियों में उन्होंने बार-बार अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों की बात कही, जिसकी वजह से युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ी।