638 करोड़ की ऑनलाइन ठगी, 17 राज्यों में फैला नेटवर्क… MP से बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा

मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का अब तक का सबसे बड़ा मामला सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि साइबर अपराधियों ने करीब 638 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। यह रकम देश के 17 राज्यों के करीब 2 लाख 93 हजार बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद इन सभी संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसके तार देश के कई हिस्सों से जुड़े हुए हैं।

डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल से करते थे ठगी

जांच एजेंसियों के मुताबिक साइबर ठग लोगों को डराने और भ्रमित करने के लिए डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, मैसेज, संदिग्ध लिंक और QR कोड का सहारा लेते थे। पहले ठगी की रकम कुछ चुनिंदा खातों में डाली जाती थी, फिर उसे तेजी से कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इसका मकसद पैसों की ट्रेल को छुपाना और जांच एजेंसियों को गुमराह करना था।

भोपाल, इंदौर और ग्वालियर बने नेटवर्क के बड़े केंद्र

इस साइबर ठगी नेटवर्क के मुख्य ठिकाने भोपाल, इंदौर और ग्वालियर बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बैंक खाते इंदौर में फ्रीज किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि यहां से ठगी की रकम को आगे अन्य राज्यों में भेजा जाता था। फिलहाल अलग-अलग राज्यों की पुलिस और साइबर एजेंसियां मिलकर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।

डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुआ भोपाल का मजदूर

इस बड़े मामले के बीच भोपाल से डिजिटल अरेस्ट का एक चौंकाने वाला उदाहरण भी सामने आया है। छोला इलाके में रहने वाला 45 वर्षीय मजदूर राजकुमार तीन दिनों तक साइबर ठगों के जाल में फंसा रहा। ठगों ने खुद को एनआईए अधिकारी बताकर उस पर टेरर फंडिंग का आरोप लगाया और उससे डेढ़ लाख रुपये ऐंठ लिए। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने रकम ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी।

वीडियो कॉल पर दिखाया पुलिस वाहन, दी एनकाउंटर की धमकी

पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने पहले उसे वीडियो कॉल पर बुलाया और कॉल के दौरान पुलिस लिखी स्कॉर्पियो दिखाई। उसे धमकी दी गई कि अगर उसने फोन काटा या भागने की कोशिश की तो उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा। इस डर से राजकुमार पूरी तरह टूट गया और आरोपियों की हर बात मानने लगा। ठगों ने उसे भरोसा दिलाया कि वे उसे निर्दोष मानते हैं, लेकिन जांच पूरी होने तक उसे डिजिटल निगरानी में रहना होगा।

तीन दिन तक मानसिक दबाव में रखा गया पीड़ित

शुक्रवार से रविवार सुबह तक आरोपी उसे लगातार कॉल और वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव में रखते रहे। हर कदम पर निगरानी का डर दिखाकर उससे रकम ट्रांसफर करवाई गई। बाद में जब परिवार को शक हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई, तब पुलिस ने तुरंत संबंधित खातों को होल्ड कराया।

साइबर सेल की जनता से अपील

साइबर सेल ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल, मैसेज या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक या QR कोड पर क्लिक करने से बचें। यदि बैंक खाते में कोई भी संदिग्ध लेन-देन नजर आए, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते ठगी की रकम को रोका जा सके और आगे की कार्रवाई संभव हो सके।