मैहर के स्कूलों में लघु निर्माण के नाम पर करोड़ों की गड़बड़ी, 22 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा लघु निर्माण घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकेंड्री स्कूलों में भवन मरम्मत, पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि कई जगहों पर कोई वास्तविक निर्माण कार्य हुआ ही नहीं। कुल 4 करोड़ 37 लाख 89 हजार 420 रुपये के कथित गबन के मामले में अब आपराधिक प्रकरण दर्ज कर पुलिस जांच शुरू हो चुकी है। एसडीएम रामनगर की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी बीईओ की शिकायत पर रामनगर थाने में 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि शासन द्वारा 22 विद्यालयों को लघु निर्माण कार्यों के लिए राशि आवंटित की गई थी। आरोप है कि कई स्कूल परिसरों में एक ईंट तक नहीं रखी गई, फिर भी संबंधित प्राचार्यों द्वारा ठेकेदार फर्मों को भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, बिना कार्य पूर्ण हुए फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर भुगतान की प्रक्रिया को वैध दर्शाया गया।

इस मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब सुलखमा स्कूल से संबंधित एक शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई। प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट हो गया कि बिना वर्क ऑर्डर और बिना किसी निर्माण के भुगतान किया गया है। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया तो कई अन्य स्कूलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं उजागर होने लगीं।

कलेक्टर मैहर के निर्देश पर गठित जांच समिति ने पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल की। एसडीएम शिव प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में बनी टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कम से कम 18 शासकीय विद्यालयों में बिना काम कराए राशि जारी की गई। रिपोर्ट में इसे शासन के धन का सीधा दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया गया है। जांच के अनुसार बड़ी राशि भोपाल की वाणी इंफ्रा इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मटेरियल सप्लायर, सतना की महाकाल ट्रेडर्स और मैहर की रुद्र इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों को दी गई। आरोप है कि इन फर्मों और विभागीय अधिकारियों के बीच मिलीभगत से भुगतान की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

पुलिस जांच में तत्कालीन बीईओ संतोष कुमार सिंह, देयक तैयार कर कोषालय में प्रस्तुत करने वाले कर्मचारी विनोद कुमार पटेल और कई विद्यालयों के प्राचार्य प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए हैं। आरोप है कि आहरण एवं संवितरण अधिकारी ने नियमों की अनदेखी करते हुए भुगतान की अनुमति दी।

रामनगर थाना पुलिस ने इस मामले में बीईओ, 17 प्राचार्यों, तीन फर्म संचालकों और एक चपरासी सहित कुल 22 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब संबंधित फर्म संचालकों और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सख्त कदम उठाते हुए प्रभारी बीईओ, 18 प्राचार्यों और एक चपरासी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कमिश्नर रीवा, संयुक्त संचालक शिक्षा, जिला पंचायत सीईओ और जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर पर की गई, ताकि जांच प्रभावित न हो और जिम्मेदारों पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।