भोपाल में मंगलवार, 10 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित एमपी कैबिनेट की बैठक कई अहम फैसलों की साक्षी बनी। बैठक में राज्य कर्मचारियों और किसानों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों के विकास तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक, कई महत्वपूर्ण विषयों पर ठोस निर्णय लिए गए। इनमें सबसे प्रमुख फैसला वर्ष 2026 के लिए नई पेंशन नीति को मंजूरी देना रहा, जो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
बैठक में रबी विपणन सत्र को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया। गेहूं उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन 7 फरवरी से शुरू होकर मार्च तक चलेगा, ताकि किसानों को समय पर समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके और खरीदी प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित हो। यह निर्णय सीधे तौर पर लाखों किसानों से जुड़ा है, जिन्हें पंजीयन के माध्यम से उपार्जन व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पारिवारिक पेंशन नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब तलाकशुदा पुत्री को भी पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलने की पात्रता दी गई है। इस निर्णय को सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे उन महिलाओं को आर्थिक सहारा मिलेगा, जो पारिवारिक परिस्थितियों के कारण असहाय स्थिति में रहती हैं।
जनजातीय अंचलों के विकास को लेकर भी कैबिनेट ने बड़ा बजटीय प्रावधान स्वीकृत किया। ‘धरती आबा’ जनजाति क्षेत्र के विकास के लिए 366 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह राशि आधारभूत सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े कार्यों पर खर्च की जाएगी, जिससे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज हो सके।
बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य सरकार 18 फरवरी को वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करेगी। इस बजट को विकासोन्मुखी और जनहितकारी बनाने की दिशा में तैयारी चल रही है, जिसमें विभिन्न वर्गों के लिए योजनाओं और प्रावधानों की झलक देखने को मिल सकती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश की प्रगति पर भी कैबिनेट बैठक में संतोष जताया गया। नेशनल हेल्थ सर्वे के अनुसार मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 पर आ गई है, जबकि शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। ये दोनों सूचकांक किसी भी राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती को दर्शाते हैं। इसके साथ ही टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश के अग्रणी पांच राज्यों में शामिल हो गया है। सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 4.43 करोड़ कार्ड बनाकर प्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है, जिससे बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है।