केंद्रीय बजट 2026 ‘विकसित भारत’ का विजन दस्तावेज: मनसुख मांडविया, महिलाओं की वैश्विक भूमिका पर जोर, अश्विनी परांजपे

इंदौर। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे, प्रदेश सहमीडिया प्रभारी दीपक जैन टीनू, हरिनारायण यादव, प्रदेश पेनलिस्ट प्रेम व्यास, मीडिया प्रभारी वरुण पाल, सह मीडिया प्रभारी नितिन शर्मा, रितेश शर्मा की उपस्थिति में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट 2026 हर नागरिक के सपनों, आकांक्षाओं और भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला बजट है। यह बजट गरीब, किसान, युवा, महिला, मध्यम वर्ग और उद्यमी के सशक्तिकरण की स्पष्ट दिशा दिखाता है। यह बजट युवाओं के सपनों को उड़ान देने वाला है, किसानों के विश्वास को मजबूत करने वाला है. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक है और मध्यम व गरीब वर्ग को सशक्त करने की सोच को आगे बढ़ाता है। बजट 2026-27 इतिहास में उस बजट के रूप में याद किया जाएगा, जिसने विकसित भारत के संकल्प को ठोस आधार दिया।

नेताओं ने कहा कि इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का पहला बजट है और वित्त मंत्री निर्मला जी ने लगातार 9वीं बार संसद में बजट प्रस्तुत किया। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में दर्ज हुआ है। बजट में तीन कर्तव्यों-आर्थिक विकास, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की परिकल्पना को साकार किया गया है।
और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

नेताओं ने कहा हमारा मानना है कि इसे केवल बजट कहना न्यायसंगत नहीं होगा, यह बजट नहीं बल्कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने वाला विजन पत्र है। यह विजन न केवल अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित है बल्कि गरीब, किसान, युवा, महिला और मध्यम वर्ग के सशक्तिकरण के लिए भी केंद्रित है। इस लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए एक प्रगतिशील, दूरगामी और प्रभावकारी बजट प्रस्तुत किया है।

सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी बजट 2026

नेताओं ने कहा कि बजट को देखकर निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि GYAN यानी G-गरीब, Y-युवा, A-अन्नदाता और N-नारी शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार समर्पित है। स्वास्थ्य के खर्च को कम करने के लिए सरकार ने दवाओं पर लगने वाले शुल्क में कटौती की है। कैंसर की 17 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क शून्य या बहुत कम कर दिया गया है। मिडल क्लास परिवारों को गुणवत्तापूर्ण इलाज देने के लिए जिला स्तर पर ‘बायोफार्मा’ और आयुष केंद्रों के लिए 10,000 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है।

नेताओं ने कहा कि अब कम या शून्य TDS सर्टिफिकेट के लिए अफसर के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। एक ऑटोमैटिक और नियम आधारित सिस्टम के जरिए यह काम आसान हो जाएगा। इससे मध्यम वर्ग के लोगों को काफी लाभ होगा। एलआरएस के तहत मिडल क्लास परिवारों के लिए विदेश घूमना और बच्चों को बाहर पढ़ाना अब सस्ता होगा। विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर टीसीएस को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है. इससे माता-पिता की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा।
नेताओं ने कहा युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए बजट में व्यापक अवसर हैं। ‘शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम’ स्थायी समिति का गठन और 15,000 माध्यमिक विद्यालयों व 500 महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना रचनात्मकता को बढ़ावा देगी। पर्यटन क्षेत्र में आई.आई.एम. के सहयोग से 10 हजार गाइडों के कौशल उन्नयन और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेल क्षेत्र में बदलाव लाने का लक्ष्य युवाओं को नई दिशा देगा। एमएसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन युवा उद्यमियों को संबल प्रदान करेगा।युवा भारत के लिए सेवा क्षेत्र पर विशेष जोर बढ़ाया जाएगा। शिक्षा के माध्यम से रोजगार और उद्यम के अवसर बढ़ाने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति बनाई जाएगी। इस समिति का लक्ष्य वर्ष 2047 तक सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वैश्विक हिस्सेदारी हासिल कर देश को अग्रणी बनाना है। यह समिति विकास, रोजगार और निर्यात की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देगी।

नेताओं ने कहा रोजगार बजट 2026 में हेल्थ केयर सिस्टम की मजबूती को ऐलान किया गया। इसे लेकर निर्मला सीतारमण ऐलान किया कि आगामी 5 सालों में 1 लाख हेल्थ प्रोफेशनल्स को जोड़ा जाएगा। 1.5 लाख केयर गिवर्स को ट्रेनिंग देने का भी ऐलान किया गया है. साथ ही राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोसाइकोलॉजी संस्थान स्थापित किया जाएगा।सरकार शिक्षा को रोजगार और उद्यम के साथ जोड़ने पर जोर देगी। विकसित भारत का मुख्य चालक सेवा क्षेत्र रहेगा, और इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी जो AI और नई तकनीकों के प्रभाव का आकलन करेगी।

नेताओं ने कहा किसानों के लिए किसानों की आय में वृद्धि करने और कृषि को आधुनिक बनाने के लिए यह बजट अत्यंत सकारात्मक है। ‘भारत-विस्तार’ नामक बहुभाषीय ए.आई. टूल के माध्यम से कृषि प्रणालियों को तकनीक से जोड़ा जाएगा। उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा देते हुए नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी फसलों के लिए विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है, साथ ही वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड बनाने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, सहकारी संस्थाओं को पशुचारे और बिनौले की आपूर्ति पर कर कटौती का लाभ देकर कृषि क्षेत्र को मजबूती दी गई है। कृषि क्षेत्र में रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने “राष्ट्रीय फाइबर योजना” शुरू करने की घोषणा की है। बजट 2026-27 में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान समृद्धि को मजबूती देने के लिए पशुपालन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। आज पशुपालन केवल सहायक गतिविधि नहीं रहा, बल्कि यह किसानों की कुल आय में लगभग 16 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। इसी दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाते हुए पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के लिए “पूंजी सब्सिडी योजना” शुरू किए जाने का प्रावधान किया गया है। 1 करोड़ किसानों समेत 3 करोड़ लोगों को आर्थिक मदद देने के लिए कोकोनट प्रोत्साहन योजना का विस्तार किया गया है।

भारत के भविष्य को सशक्त बनाने वाला बजट

भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बजट 2026-27 ने यह स्वीकार किया है कि शहर केवल रहने के स्थान नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के इंजन हैं। नए इकोनॉमिक ज़ोन का उद्देश्य शहरों को अव्यवस्थित विस्तार से निकालकर योजनाबद्व, उत्पादक और रोजगार-केंद्रित विकास मॉडल की ओर ले जाना है। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प की मजबूती के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने का प्रस्ताव। इससे देश के बुनकरों, ग्राम उद्योगों, एक जिला-एक उत्पाद पहल और ग्रामीण युवाओं को लाभ होगा।

नेताओं ने कहा स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए ‘बायोफार्मा शक्ति’ के तहत 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन और तीन नए एन.आई.पी.ई.आर. (NIPER) संस्थानों का निर्माण भारत को वैश्विक बायोफार्मा केंद्र बनाएगा। 17 दवाओं और 7 असाध्य रोगों की दवाओं पर सीमा शुल्क में छूट और अगले पांच वर्षों में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को जोड़ने का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाएगा। एक हजार से अधिक मान्यता प्राप्त इंडिया क्लिनिकल ट्रायल्स स्थलों का नेटवर्क बनाया जाएगा।

नेताओं ने कहा आज जरूरत है कि हम सब मिलकर सरकार के प्रयासों का साथ दें, सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें और अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी व परिश्रम से योगदान दें। जब सरकार और जनता एक साथ चलते हैं, तभी बड़ा परिवर्तन संभव होता है। बजट 2026 को एक सशक्त भारत, समृद्ध भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के एक अवसर के रूप में स्वीकार करें। आइए, हम सब मिलकर इस बजट की भावना को जन-जन तक पहुंचाएं और राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभाएं।

महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला बजट

प्रधानमंत्री मोदी जी बार-बार कहते हैं कि महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत की ग्रोथ इंजन हैं। यही कारण है कि हमारी सरकार ने महिला सशक्तिकरण को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे नीति और नीयत दोनों का हिस्सा बनाया। बजट 2026 इसी स्पष्ट नीयत का प्रमाण है, जहां हर योजना, हर निवेश और हर सुधार के केंद्र में महिला की गरिमा, सुरक्षा, स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता को रखा गया है।

नेताओं ने कहा कि हमारी सरकार की पहचान रही है रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि भारत अब केवल सुधारों की चर्चा नहीं करता, बल्कि “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार होकर तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इस रिफॉर्म एक्सप्रेस का सबसे मजबूत इंजन ‘नारी शक्ति’ हैं। बजट 2026 में महिला सशक्तिकरण के लिए जो रोडमैप प्रस्तुत किया गया है, वह सामाजिक न्याय से आगे बढ़कर आर्थिक भागीदारी, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक महिलाओं की भूमिका को विस्तार देता है।

नेताओं ने कहा युवाओं के लिए अवसर सृजन हमारी सरकार की प्राथमिकता है, और इसमें युवा महिलाओं की भूमिका केंद्रीय है। स्किल इंडिया, डिजिटल स्किल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी में युवाओं को प्रशिक्षित कर भारत भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार कर रहा है।
महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए बजट में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। वी.जी.एफ. और पूंजीगत सहायता के माध्यम से देश के प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्थापना का प्रस्ताव है, इसके लिए लगभग 10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे छात्राओं को सुरक्षित आवास मिल सकेगा। महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने हेतु 1.5 लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं और 1 लाख संबद्व स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण के तहत संसाधनों और अवसरों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ग्रामीण महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए विशेष पहल की गई है, जिसमें लखपति दीदी योजना पर आधारित सामुदायिक स्व-सहायता समूह उद्यम स्थापित करने का प्रावधान है। इससे महिलाओं को क्रेडिट लिंक्ड आजीविका से उद्यम स्वामित्व की ओर जाने में मदद मिलेगी।

नेताओं ने कहा एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड घोषित किया गया है, जो महिलाओं के लिए इक्विटी सपोर्ट प्रदान करेगा। देखा जाए तो पहली बार उद्यमी महिलाओं के लिए टर्म लोन और मेंटरशिप का विस्तार किया गया है। लखपति दीदी योजना की सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए शुरू हुई इस योजना को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। योजना के तहत महिलाओं को आजीविका से बढ़ाकर बिजनेस वुमन बनाने की ओर बढ़ाया जाएगा। इसके लिए कई तरह की पहलें शुरू की जाएंगी, ताकि वे उद्यमी की भूमिका में आएं।