स्वच्छ सर्वेक्षण 2025–26 के 10वें संस्करण को लेकर इंदौर नगर निगम पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। चर्चा है कि केंद्रीय टीम जल्द ही शहर के निरीक्षण पर आ सकती है, ऐसे में हर जोन में सफाई व्यवस्था, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, ट्रेंचिंग ग्राउंड प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति और नागरिक सहभागिता जैसे पहलुओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। नगर निगम के अधिकारी और मैदानी अमला लगातार समीक्षा बैठकों के जरिए व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे हैं, ताकि सर्वेक्षण के दौरान किसी प्रकार की कमी सामने न आए।
हाल ही में भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई घटना को लेकर भी अंदरूनी स्तर पर चिंता जताई जा रही है कि कहीं इसका नकारात्मक प्रभाव शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर न पड़े। अधिकारियों का मानना है कि स्वच्छ सर्वेक्षण में अब केवल सफाई ही नहीं, बल्कि मैदानी प्रबंधन, कचरा निपटान की वैज्ञानिक प्रक्रिया, नागरिक शिकायतों के समाधान की गति और जमीनी क्रियान्वयन की गुणवत्ता भी अंक तय करती है। ऐसे में किसी भी क्षेत्र में अव्यवस्था या लापरवाही भारी पड़ सकती है।
बताया जा रहा है कि इस बार सर्वेक्षण में कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष फोकस रहेगा। यदि किसी भी मानक में 50 प्रतिशत तक कमी पाई जाती है तो सीधे 30 अंकों की कटौती का प्रावधान है। यही कारण है कि निगम ने सभी जोन अधिकारियों, स्वास्थ्य अधिकारियों और सफाई निरीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फील्ड स्तर पर लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर वार्ड में दैनिक मॉनिटरिंग और फोटो अपलोडिंग की व्यवस्था भी सख्ती से लागू की जा रही है।
स्वच्छ सर्वेक्षण के 10वें संस्करण में 10 प्रमुख मापदंडों पर मूल्यांकन किया जाएगा। इनमें कचरा पृथक्करण, गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक निपटान, सी एंड डी वेस्ट प्रबंधन, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, नागरिक फीडबैक, ओडीएफ प्लस की स्थिति, जल निकासी व्यवस्था, डोर-टू-डोर कलेक्शन, ट्रांसफर स्टेशन की व्यवस्था और नवाचार जैसे बिंदु शामिल हैं। इन सभी मानकों पर शहर की तैयारी को परखा जाएगा।
इधर, सफाई मित्रों का मनोबल भी सातवें आसमान पर है। लगातार आठ बार देश में नंबर वन रहने के बाद अब नौवीं बार शीर्ष स्थान हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया है। सफाईकर्मियों को विशेष ब्रीफिंग दी जा रही है और उन्हें यह समझाया जा रहा है कि उनकी मेहनत ही इंदौर को फिर से नंबर वन बना सकती है। कई स्थानों पर मोटिवेशनल मीटिंग और सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
इस बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी साफ कहा है कि इंदौर पहले भी नंबर वन था, अभी भी है और आगे भी रहेगा। उन्होंने निगम अमले को निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए और शहर की पहचान को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। मंत्री के बयान से निगम अमले और सफाई मित्रों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।