राज्य के शहरी इलाकों में व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने के लिए सरकार बड़े बदलाव की तैयारी में है। योजना के तहत बाजार, मॉल, रेस्टोरेंट, बिजनेस सेंटर और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यालयों को 24 घंटे संचालित करने की अनुमति देने पर काम शुरू हो गया है। इससे महानगरों जैसी नाइट इकोनॉमी का मॉडल प्रदेश के शहरों में भी दिखाई दे सकेगा।
इस पहल के लिए मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958 में संशोधन प्रस्तावित है। खासतौर पर अधिनियम की धारा-6 में बदलाव कर समय-सीमा संबंधी प्रतिबंधों को शिथिल किया जाएगा, ताकि प्रतिष्ठान अपनी जरूरत के अनुसार चौबीसों घंटे खुल सकें। शासन स्तर पर ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
अन्य राज्यों के सफल मॉडल को आधार बनाया जा रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना में पहले से ही इस तरह की व्यवस्था लागू है, जहां रात के समय भी व्यापारिक गतिविधियां निर्बाध रूप से चलती हैं। अब उसी तर्ज पर मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी बाजारों को 24×7 खोलने का रास्ता साफ किया जा रहा है।
इस निर्णय के पीछे रोजगार और राजस्व बढ़ाने की मंशा भी है। केंद्र सरकार की सलाह के बाद राज्य ने नाइट इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अनुमान है कि इससे सेवा क्षेत्र, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बड़े पैमाने पर नए रोजगार सृजित होंगे, साथ ही कर संग्रह में भी वृद्धि होगी।
विशेष रूप से बीपीओ, आईटी कंपनियों और नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। रात में काम करने वाले हजारों लोगों को भोजन, परिवहन और आवश्यक सेवाएं सहज उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और जीवन-शैली दोनों में सुधार होगा।