हाईवे पर बढ़ेंगी स्पीड लेजर गन की संख्या, गाड़ियों की रफ्तार पर लगेगी लगाम

रांची.

राज्य में सड़क दुर्घटना रोकने के लिए झारखंड पुलिस लगातार कोशिश में जुटी है। सड़क दुर्घटना के कारणों में वाहनों के रफ्तार को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। वाहनों के रफ्तार पर लगाम कसने के लिए हाइवे पर स्पीड लेजर गन की संख्या बढ़ाने पर विचार हुआ है। इसकी खरीदारी होने जा रही है।

वहीं, शहरों में बेहतर गुणवत्ता के कैमरे भी जहां-तहां चौक-चौराहों पर लगेंगे, जो नंबर प्लेट की पहचान कर नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान जेनरेट करके भेजेंगे। दूसरे राज्यों में हाइवे पर वर्तमान में ऐसे कैमरे लग रहे हैं, जो स्पीड लेजर गन की तरह काम कर रहे हैं। कैमरे में स्पीड लिमिट तय है। उस स्पीड लिमिट को जैसे ही उक्त वाहन क्रास करता है, उसका स्वत: कट जाता है। राजधानी के भीतर वाहनों की रफ्तार पर लगाम कसने के लिए विशेष वाहन इंटरसेप्टर को भी उतारा गया था, लेकिन उक्त वाहन खराब पड़ा है। सड़क सुरक्षा कोषांग ने नए विशेष वाहन, इंटरसेप्टर खरीदने के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा की थी। इसपर भी काम चल रहा है।

राज्य में नए कैमरे, नए विशेष वाहन इंटरसेप्टर सहित सड़क सुरक्षा के लिए नए-नए उपकरणों की खरीदारी होनी है। कोषांग ने सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के लिए मोटर वाहन अधिनियम का सौ प्रतिशत अनुपालन पर जोर दिया है, जिसके लिए उपरोक्त उपकरणों की आवश्यकता पड़ेगी। करीब 30-31 तरह के उपकरण से राज्य की यातायात पुलिस लैस होगी। इनमें स्पीड लेजर गन, विशेष वाहन इंटरसेप्टर, ब्रेद एनालाइजर, स्ट्रेचर, हाई रेजोल्यूशन कैमरे, बटन कैमरे, व्हील लाक, बाडी वोर्न कैमरे आदि शामिल हैं। ये पुलिस को कानून के अनुपालन में मदद भी करेंगे और बदनामी से भी बचाएंगे। बॉडी ओर्न कैमरे चौक-चौराहों पर तैनात यातायात पुलिस को लगाने होंगे, ताकि आम नागरिक से उनके किए गए बर्ताव उसमें रिकार्ड हो सकें। इससे यह होगा कि पुलिस पर लगने वाले दुर्व्यवहार के आरोपों से उक्त पुलिसकर्मी, पदाधिकारी बच सके।

बेहतर स्वास्थ सुविधा पर भी जोर
सड़क दुर्घटना में अधिक से अधिक घायलों की जान बच सके, इसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पर भी जोर दिया गया है। अब सभी जिलों में वहां के सिविल सर्जन व वहां की पुलिस के बीच आपसी समन्वय और मजबूत होगी। घायलों को अस्पताल ले जाने पर बेहतर समन्वय से घायलों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए भी सभी सिविल सर्जन को राज्य सरकार की ओर से सतर्क किया गया है। सरकार की ओर से जारी पत्र में सड़क सुरक्षा कोषांग की समीक्षा बैठक में आए तथ्यों को भी शामिल किया गया है।