महाशिवरात्रि पर अपनाएं ये असरदार उपाय, कालसर्प और राहु दोष से मिलेगी मुक्ति

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा अवसर है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार महाशिवरात्रि पर काल सर्प दोष और राहु दोष के निवारण के लिए किए गए उपाय विशेष फलदायी होते हैं। वर्ष 2026 में यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाएगा।

क्या है काल सर्प दोष?

जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित हो जाते हैं, तो इसे काल सर्प दोष कहा जाता है। यह दोष व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की बाधाएं उत्पन्न करता है। करियर में रुकावट, वैवाहिक जीवन में तनाव और आर्थिक समस्याएं इसके प्रमुख प्रभाव हैं।

काल सर्प दोष कई प्रकार का होता है। अनंत काल सर्प, कुलिक काल सर्प, वासुकि काल सर्प, शंखपाल काल सर्प जैसे इसके विभिन्न प्रकार हैं। हर प्रकार का प्रभाव अलग-अलग होता है। इसका निवारण महाशिवरात्रि पर सबसे प्रभावी माना जाता है।

राहु दोष और उसका प्रभाव

राहु एक छाया ग्रह है जो कुंडली में अशुभ स्थान पर होने पर अनेक समस्याएं पैदा करता है। राहु दोष से पीड़ित व्यक्ति को मानसिक अशांति, भ्रम और अचानक आने वाली परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यह दोष व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करता है।

राहु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो तो इसका प्रभाव और गहरा होता है। ऐसे में महाशिवरात्रि पर विशेष उपाय करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

महाशिवरात्रि पर काल सर्प दोष निवारण के उपाय

महाशिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके शिवलिंग पर दूध, जल, बेलपत्र और धतूरे के फूल अर्पित करें। शिव मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक कराना इस दोष के निवारण का सबसे प्रभावी उपाय है।

नागदेवता की पूजा भी काल सर्प दोष में लाभकारी होती है। शिवलिंग पर चांदी या तांबे का नाग चढ़ाएं। महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र शिव कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग है।

रात्रि जागरण करते हुए ओम नमः शिवाय का निरंतर जाप करें। चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग पर अभिषेक करें और भोलेनाथ का ध्यान करें।

राहु दोष दूर करने के उपाय

महाशिवरात्रि पर राहु दोष निवारण के लिए काले तिल को जल में मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। काले कपड़े में नारियल, उड़द दाल और सरसों रखकर शिव मंदिर में दान करें।

राहु के प्रभाव को कम करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ भी इस दिन किया जा सकता है। गोमेद रत्न धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

शिव मंदिर में सांप वाले शिवलिंग की पूजा विशेष रूप से करें। पंचामृत से अभिषेक करें और शिव चालीसा का पाठ करें। रात्रि में जागरण करते हुए शिव स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी होता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

महाशिवरात्रि पर व्रत रखना आवश्यक है। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और मांसाहार से पूर्ण परहेज करें। मद्यपान और तामसिक भोजन से दूर रहें। पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।

कुंडली में काल सर्प दोष की पुष्टि किसी अनुभवी ज्योतिषी से कराएं। बिना विशेषज्ञ की सलाह के कोई भी विशेष अनुष्ठान न करें। गलत तरीके से की गई पूजा लाभ की जगह हानि पहुंचा सकती है।

शिव मंदिर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। गरीबों को वस्त्र और भोजन का दान करें। दान-पुण्य का कार्य ग्रह दोषों के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से महाशिवरात्रि का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में महाशिवरात्रि को ग्रह शांति के लिए वर्ष का सबसे शुभ दिन माना गया है। इस दिन ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है। शिव की उपासना से नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव स्वतः कम होने लगता है।

काल सर्प दोष और राहु दोष दोनों ही भगवान शिव की कृपा से शांत होते हैं। शिव को नागों का स्वामी माना जाता है इसलिए उनकी पूजा इन दोषों के निवारण में सर्वाधिक प्रभावी है। विश्वास और श्रद्धा के साथ की गई पूजा अवश्य फल देती है।