Pension + Health Cover: केंद्र की बड़ी तैयारी, अब पेंशन के साथ मिलेगा हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ

केंद्र सरकार पेंशन से जुड़े निवेशकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। मौजूदा विचार यह है कि लंबी अवधि के पेंशन उत्पादों में स्वास्थ्य बीमा का विकल्प जोड़ा जाए, ताकि निवेशकों को रिटायरमेंट के बाद आय और इलाज, दोनों स्तरों पर सुरक्षा मिल सके। बाजार और नीति हलकों में इस पहल को पेंशन ढांचे के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है।

मामले से जुड़े संकेत बताते हैं कि फोकस उन निवेशकों पर है जो नियमित पेंशन आय के लिए लंबे समय तक योगदान करते हैं। अभी तक पेंशन और स्वास्थ्य सुरक्षा अलग-अलग उत्पादों के रूप में काम करते रहे हैं। नई तैयारी का उद्देश्य इन दोनों जरूरतों को एकीकृत मॉडल में लाना है, जिससे बुजुर्ग अवस्था में जेब से होने वाला चिकित्सा खर्च कम किया जा सके।

नीति स्तर पर यह भी समझा जा रहा है कि रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी वित्तीय चुनौती स्वास्थ्य खर्च होती है। पेंशन से मासिक आय मिलती है, लेकिन गंभीर बीमारी की स्थिति में अलग बीमा सुरक्षा जरूरी होती है। इसी वजह से सरकार पेंशन निवेशकों को स्वास्थ्य कवर जोड़ने के व्यावहारिक ढांचे पर विचार कर रही है।

प्रस्ताव का फोकस: एकीकृत रिटायरमेंट सुरक्षा

प्रारंभिक चर्चा के मुताबिक मॉडल ऐसा हो सकता है जिसमें निवेशक पेंशन खाते के साथ हेल्थ इंश्योरेंस विकल्प चुन सकें। इससे उत्पाद की उपयोगिता बढ़ेगी और निवेशक को अलग-अलग योजनाओं में जाने की जरूरत कम होगी। हालांकि, कवरेज सीमा, प्रीमियम संरचना, परिवार को कवर करने के नियम और क्लेम की शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं।

विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग केवल पेंशन तक सीमित नहीं रह सकती। आयु बढ़ने के साथ चिकित्सा जरूरतें बढ़ती हैं और स्वास्थ्य पर खर्च तेज होता है। ऐसे में पेंशन और स्वास्थ्य बीमा का संयोजन निवेशकों के लिए अधिक व्यावहारिक सुरक्षा दे सकता है। सरकार की मौजूदा तैयारी इसी दिशा में एक नीतिगत कदम मानी जा रही है।

यह भी संभव है कि योजना लागू होने पर निवेशकों को वैकल्पिक मॉड्यूल दिए जाएं, ताकि वे अपनी जरूरत और भुगतान क्षमता के अनुसार कवर चुन सकें। हालांकि इस पर अंतिम स्थिति आधिकारिक दस्तावेज के बाद ही साफ होगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी में इतना स्पष्ट है कि नीति की दिशा रिटायरमेंट सुरक्षा को बहु-स्तरीय बनाने की है।

निवेशकों के लिए क्या रहेगा अहम

यदि यह ढांचा लागू होता है, तो निवेशकों को तीन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना होगा। पहला, पेंशन अंशदान और बीमा प्रीमियम का आपसी संबंध क्या होगा। दूसरा, अस्पताल नेटवर्क और क्लेम प्रक्रिया कितनी सरल होगी। तीसरा, रिटायरमेंट के बाद प्रीमियम भुगतान की व्यवस्था कैसे तय की जाएगी। ये तीनों बिंदु योजना की वास्तविक उपयोगिता तय करेंगे।

नीति के लागू होने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना भी जरूरी होगा कि क्या स्वास्थ्य कवर अनिवार्य होगा या वैकल्पिक, और क्या यह कवर व्यक्ति-विशेष तक सीमित रहेगा या परिवार के लिए भी उपलब्ध होगा। इसी तरह, पहले से मौजूद स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी रखने वालों के लिए अलग शर्तें बनेंगी या नहीं, यह भी अधिसूचना के बाद स्पष्ट होगा।

फिलहाल सरकार की तरफ से संकेत यही हैं कि निवेशकों को रिटायरमेंट के बाद बेहतर वित्तीय सुरक्षा देने के लिए पेंशन ढांचे को मजबूत किया जाए। पेंशन के साथ स्वास्थ्य बीमा जोड़ने की तैयारी उसी व्यापक सोच का हिस्सा है। अंतिम नियम, पात्रता और लाभ संरचना आधिकारिक घोषणा के बाद ही लागू मानी जाएगी।