इंदौर के खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में अनधिकृत प्रवेश का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी और मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष शिवम वर्मा ने 14 फरवरी 2026 को मामले का संज्ञान लेकर तत्काल जांच कराई। जांच के बाद ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड को सेवा से हटाया गया, सुरक्षा एजेंसी पर आर्थिक दंड लगाया गया और एक स्थानीय व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई शुरू की गई।
यह मामला सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में वायरल वीडियो आने के बाद सामने आया। प्रशासन के अनुसार घटना 11 फरवरी को शाम 7:41 बजे से 7:45 बजे के बीच हुई। वीडियो के आधार पर मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें गर्भगृह के चैनल गेट से प्रवेश की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने इसे मंदिर की गरिमा और तय प्रोटोकॉल के उल्लंघन के रूप में दर्ज किया है।
सीसीटीवी जांच में क्या सामने आया
प्रशासन की जांच में पाया गया कि स्थानीय निवासी आकाश रावत ने गर्भगृह के चैनल गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड से बातचीत की। इसके बाद ड्यूटी पर मौजूद गार्ड ने चैनल गेट खोला और सतीश भाऊ नामक व्यक्ति अंदर गया। सुरक्षा एजेंसी बालाजी सिक्युरिटी सर्विस की ओर से नियुक्त गार्ड श्रीमती ज्योति वरूण ने लिखित प्रतिवेदन में कहा कि आकाश रावत ने दबाव बनाकर दो व्यक्तियों को गर्भगृह में अनधिकृत रूप से प्रवेश कराया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया ड्यूटी में गंभीर लापरवाही हुई है। मंदिर प्रबंध समिति के निर्णयों के पालन में चूक पाई गई। इसी आधार पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने कहा कि घटना के समय ड्यूटी प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ, जिससे नियमों का उल्लंघन संभव हुआ।
प्रशासन की कार्रवाई: बर्खास्तगी, जुर्माना और एफआईआर
मामले में ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षा गार्ड को तत्काल मंदिर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसी मेसर्स बालाजी सिक्युरिटी सर्विस पर 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह राशि एजेंसी के आगामी देयक से समायोजित की जाएगी। प्रशासन ने इसे ठेका शर्तों और सुरक्षा जवाबदेही से जुड़ा दंडात्मक कदम बताया है।
प्रशासन ने स्थानीय निवासी आकाश रावत के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि उसने बिना अनुमति गर्भगृह में प्रवेश दिलाया और ड्यूटी पर तैनात गार्ड पर दबाव बनाया। इसी आधार पर उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुजारियों और प्रबंध समिति को निर्देश
मंदिर में पूजन-पाठ से जुड़े भट्ट परिवार की दोनों शाखाओं के उस समय उपस्थित पुजारियों को प्रशासन ने चेतावनी जारी की है। निर्देश दिया गया है कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए हर स्तर पर सावधानी बरती जाए। समिति ने कहा कि अनधिकृत प्रवेश की किसी भी स्थिति में तुरंत प्रशासन और सुरक्षा तंत्र को सूचित करना अनिवार्य होगा।
मंदिर प्रबंध समिति और पुजारीगण ने सर्वसम्मति से दोहराया कि गर्भगृह में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है। केवल विशेष परिस्थितियों में, अध्यक्ष और प्रशासक की पूर्व अनुमति मिलने पर ही प्रवेश संभव होगा। यह निर्णय पूर्व निर्धारित व्यवस्था का पुनर्पुष्टिकरण माना जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी तरह की व्याख्या की गुंजाइश न रहे।
कलेक्टर का बयान और आगे की निगरानी
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि आस्था केंद्रों की मर्यादा और नियमों का पालन हर स्थिति में सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने संकेत दिया है कि मंदिर परिसर में सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जाएगी और ड्यूटी जवाबदेही को लिखित रूप से कड़ा किया जाएगा।
“आस्था के केंद्रों की मर्यादा और नियमों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी की जाएगी।” — शिवम वर्मा, कलेक्टर इंदौर
यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रिया में भी आगे बढ़ेगा। 11 फरवरी की घटना को जांच में पुष्ट मानते हुए जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही पर त्वरित और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।