न गटर हटेगी, न शटर टूटेगा: मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ‘नेटम’ तकनीक से बनेगा छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन, बिना मकान तोड़े निकलेगी मेट्रो

इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में एक अनूठा इंजीनियरिंग कारनामा देखने को मिलेगा। छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन को जमीन से करीब 38 मीटर की गहराई पर बनाया जाएगा। इसके लिए NATM यानी न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह इंदौर मेट्रो का सबसे गहरा अंडरग्राउंड स्टेशन होगा।

क्यों जरूरी है NATM तकनीक?

छोटा गणपति क्षेत्र में सतह पर घनी आबादी और व्यस्त बाजार हैं। यहां पारंपरिक कट-एंड-कवर विधि से निर्माण करना संभव नहीं है। ऐसे में NATM तकनीक सबसे उपयुक्त मानी गई है। इस विधि में सुरंग खोदने के बाद चट्टान को ही सहारा बनाया जाता है। शॉटक्रीट और रॉक बोल्ट की मदद से सुरंग को मजबूती दी जाती है।

NATM तकनीक दुनियाभर में पहाड़ी और शहरी इलाकों में सुरंग बनाने के लिए प्रसिद्ध है। इसमें विस्फोट के बजाय नियंत्रित खुदाई की जाती है। इससे आसपास की इमारतों और संरचनाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

38 मीटर गहराई पर स्टेशन की चुनौतियां

इतनी गहराई पर स्टेशन बनाना इंजीनियरिंग की दृष्टि से बड़ी चुनौती है। यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचाने के लिए लंबे एस्केलेटर और लिफ्ट लगाने होंगे। वेंटिलेशन और आपातकालीन निकासी की भी विशेष व्यवस्था करनी होगी। जलस्तर और मिट्टी की स्थिति को देखते हुए विस्तृत भू-तकनीकी सर्वेक्षण किया जा रहा है।

इंदौर मेट्रो के अधिकारियों के अनुसार इस स्टेशन का डिजाइन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इंदौर मेट्रो परियोजना की प्रगति

इंदौर मेट्रो मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना के तहत शहर के प्रमुख इलाकों को जोड़ा जाएगा। अंडरग्राउंड और एलिवेटेड दोनों तरह के स्टेशन बनाए जा रहे हैं। छोटा गणपति स्टेशन अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा है।

मेट्रो के इस हिस्से में टनल बोरिंग मशीन (TBM) और NATM दोनों तकनीकों का इस्तेमाल होगा। जहां सुरंग की खुदाई सीधी है वहां TBM का उपयोग होगा। जबकि स्टेशन जैसे बड़े और जटिल हिस्सों में NATM अपनाई जाएगी।

यात्रियों के लिए क्या होगा खास

छोटा गणपति स्टेशन इंदौर के व्यस्ततम इलाकों में से एक में स्थित होगा। इससे हजारों लोगों को सीधे मेट्रो सेवा का लाभ मिलेगा। स्टेशन पर आधुनिक सुविधाएं जैसे एयर कंडीशनिंग, डिजिटल सूचना पैनल और विकलांगजन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

इस स्टेशन से राजवाड़ा, सर्राफा बाजार और अन्य प्रमुख स्थानों तक पहुंच आसान हो जाएगी। मेट्रो शुरू होने के बाद इस क्षेत्र में सड़कों पर यातायात का दबाव काफी कम होने की उम्मीद है।

NATM तकनीक का भारत में उपयोग

भारत में NATM तकनीक का इस्तेमाल पहले भी कई परियोजनाओं में हो चुका है। दिल्ली मेट्रो, मुंबई मेट्रो और कई हाईवे सुरंग परियोजनाओं में यह विधि अपनाई गई है। इस तकनीक में निर्माण के दौरान लगातार निगरानी की जाती है। सेंसर और मापक उपकरणों से सुरंग की स्थिति पर नजर रखी जाती है।

इंदौर में इस तकनीक का उपयोग पहली बार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां की भूगर्भीय स्थिति NATM के अनुकूल है। बेसाल्ट चट्टान की मौजूदगी सुरंग निर्माण में सहायक होगी।

इंदौर मेट्रो के पूरा होने पर शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। छोटा गणपति स्टेशन इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा जो तकनीकी दृष्टि से भी उल्लेखनीय रहेगा।