राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में एक केमिकल और पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की जलकर मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
कैसे हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में रखे केमिकल में अचानक आग लग गई। केमिकल और पटाखों के कारण आग तेजी से फैली। फैक्ट्री के अंदर काम कर रहे मजदूर बाहर नहीं निकल पाए। देखते ही देखते पूरी फैक्ट्री आग की चपेट में आ गई।
आग इतनी भीषण थी कि आसपास के इलाकों में भी दहशत फैल गई। धमाकों की आवाजें दूर तक सुनाई दीं। स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन और फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
बचाव कार्य और प्रशासन की कार्रवाई
सूचना मिलने के बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। आग पर काबू पाने में काफी समय लगा। केमिकल की मौजूदगी से बचाव कार्य में कठिनाई आई। पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे।
आग बुझने के बाद जब फैक्ट्री की तलाशी ली गई तो 8 शव बरामद हुए। शवों की हालत इतनी खराब थी कि पहचान में कठिनाई हो रही थी। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए।
अवैध फैक्ट्री संचालन पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद फैक्ट्री के अवैध संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बिना उचित लाइसेंस और सुरक्षा मानकों के यह फैक्ट्री चलाई जा रही थी। केमिकल और पटाखों का भंडारण नियमों के विरुद्ध था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस फैक्ट्री के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं। लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस लापरवाही ने 8 लोगों की जान ले ली।
मुआवजे और जांच की मांग
मृतकों के परिजनों ने मुआवजे और फैक्ट्री मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राजस्थान में औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध फैक्ट्रियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण ऐसे हादसे बार-बार होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को औद्योगिक सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए।
भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति
भिवाड़ी दिल्ली-एनसीआर से सटा एक प्रमुख औद्योगिक शहर है। यहां सैकड़ों फैक्ट्रियां संचालित होती हैं। इनमें से कई बिना उचित अनुमति के चल रही हैं। पहले भी यहां आग लगने और औद्योगिक दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और नियामक व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है। प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाए। मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा और न्याय मिलना अभी बाकी है।