Land Aadhaar Concept: अब हर भूखंड को मिलेगी यूनिक पहचान, जमीन का भी बनेगा ‘आधार कार्ड’, जानें इसके फायदे

दिल्ली में अब इंसानों की तरह जमीन का भी आधार कार्ड बनेगा। केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) योजना के तहत दिल्ली में जमीन के हर प्लॉट को एक यूनिक आइडेंटिटी नंबर दिया जा रहा है। इसे यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी ULPIN कहा जाता है।

इस पहल का मकसद भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। जिस तरह आधार कार्ड हर नागरिक की पहचान का अहम दस्तावेज है, उसी तरह ULPIN हर जमीन के टुकड़े की विशिष्ट पहचान बनेगा।

क्या है ULPIN और कैसे काम करता है?

ULPIN एक 14 अंकों का यूनिक नंबर है। यह नंबर जमीन के हर प्लॉट के भौगोलिक निर्देशांक (जियो-कोऑर्डिनेट्स) के आधार पर तैयार किया जाता है। इसमें अक्षांश और देशांतर की जानकारी शामिल होती है।

हर प्लॉट को GIS मैपिंग के जरिए चिह्नित किया जाता है। इसके बाद उसे एक अलग पहचान नंबर दे दिया जाता है। यह नंबर उस जमीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड से लिंक होता है।

इसमें मालिकाना हक, म्यूटेशन रिकॉर्ड, रजिस्ट्री डिटेल और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल रहते हैं। एक बार ULPIN जारी होने के बाद उस जमीन की पूरी हिस्ट्री डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी।

ULPIN के 5 प्रमुख फायदे

1. जमीन विवादों में कमी: भारत में कोर्ट में लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा भूमि विवादों से जुड़ा है। ULPIN से हर जमीन की स्पष्ट पहचान होगी। इससे डुप्लीकेट दावों और फर्जी मालिकाना हक के मामले कम होंगे।

2. भूमि रिकॉर्ड में पारदर्शिता: सभी रिकॉर्ड डिजिटल और एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। इससे किसी भी जमीन की जानकारी आसानी से वेरिफाई की जा सकेगी। भ्रष्टाचार और दलालों की भूमिका कम होगी।

3. प्रॉपर्टी लेनदेन में आसानी: जमीन खरीदने या बेचने से पहले ULPIN के जरिए प्लॉट की पूरी जानकारी जांची जा सकेगी। बैंक लोन प्रक्रिया भी तेज होगी क्योंकि भूमि सत्यापन जल्दी हो सकेगा।

4. सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन: सरकार को भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और विकास योजनाओं में सटीक डेटा मिलेगा। इससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा।

5. कानूनी सुरक्षा: ULPIN से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड कानूनी साक्ष्य के तौर पर काम करेगा। जमीन के मालिक को अपने अधिकार साबित करने में आसानी होगी।

दिल्ली में कैसे हो रहा है लागू?

दिल्ली सरकार ने राजस्व विभाग के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को शुरू किया है। पहले चरण में दिल्ली के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जमीन की GIS मैपिंग की जा रही है। इसके बाद शहरी इलाकों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

सर्वे ऑफ इंडिया और राज्य के राजस्व विभाग इस प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जमीन की सीमाओं को ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए मैप किया जा रहा है।

देशभर में ULPIN की स्थिति

केंद्र सरकार ने 2021 में ULPIN को पूरे देश में लागू करने की घोषणा की थी। कई राज्यों में यह पहले से काम कर रहा है। दिल्ली में इसकी शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस योजना का उद्देश्य 2025-26 तक देश की सभी जमीनों को ULPIN से जोड़ना है। इससे भारत का भूमि प्रशासन पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा।

नागरिकों के लिए क्या बदलेगा?

आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकेगा। पटवारी और तहसील के चक्कर कम होंगे। प्रॉपर्टी से जुड़ी धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी इससे फायदा होगा। वे ULPIN के आधार पर जमीन का सत्यापन कर सकेंगे। इससे लोन प्रोसेसिंग में लगने वाला समय घटेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ULPIN भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। जमीन से जुड़ी जानकारी पारदर्शी होने से निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।