मस्जिदों पर लगे ऊँचे लाउडस्पीकर हटाने की मांग: इंदौर महापौर ने कलेक्टर से की चर्चा

Indore News: इंदौर में ध्वनि प्रदूषण को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग उठी है। बड़े डीजे और हाई-पावर लाउडस्पीकर पर पहले से लागू रोक के बाद अब ऊंची मीनारों पर लगाए गए लाउडस्पीकरों को भी नियमों के दायरे में लाने की बात सामने आई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस विषय पर कलेक्टर से चर्चा कर शहर के कई इलाकों से मिल रही शिकायतों की जानकारी दी है।
महापौर के अनुसार, अलग-अलग वार्डों से लगातार यह कहा जा रहा है कि बहुत ऊंचाई पर लगाए गए स्पीकरों की आवाज दूर तक फैलती है और आसपास की बस्तियों में ध्वनि का दबाव बढ़ता है। नगर स्तर पर यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब पूरे शहर में शैक्षणिक परीक्षाओं का दौर चलता रहता है और पढ़ाई के लिए शांत माहौल की मांग बढ़ जाती है।
परीक्षा काल और आबादी वाले इलाकों में बढ़ी चिंता
महापौर ने कलेक्टर से चर्चा में कहा कि इंदौर में स्कूल परीक्षाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाएं भी सालभर चलती हैं। ऐसे में अचानक या लगातार तेज ध्वनि से छात्रों की तैयारी प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि तेज आवाज से बुजुर्गों और अस्वस्थ लोगों को दिक्कतें बढ़ती हैं, इसलिए ध्वनि नियंत्रण को केवल आयोजन स्थलों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि यदि डीजे और अन्य ध्वनि उपकरणों पर प्रशासन नियम लागू कर सकता है, तो धार्मिक स्थलों पर लगे ऊंचे लाउडस्पीकरों के मामले में भी समान मानक लागू किए जाएं। उन्होंने इसे किसी एक संस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की दैनिक समस्या बताया।
किन वार्डों से आईं ज्यादा शिकायतें
महापौर ने जिन क्षेत्रों का उल्लेख किया, उनमें वार्ड 72 का लोकमान्य नगर, वार्ड 41 और वार्ड 48 प्रमुख हैं। इन इलाकों के निवासियों ने शिकायतों में कहा कि मीनारों पर लगे स्पीकरों की आवाज व्यापक क्षेत्र में सुनाई देती है, जिससे दिनचर्या और एकाग्रता प्रभावित होती है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि शिकायतों का क्षेत्रवार सत्यापन कर वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट तैयार की जाए।
नगर प्रशासन के स्तर पर यह भी संकेत दिया गया है कि ध्वनि प्रदूषण के मामलों में स्थानीय फीडबैक, मैदानी निरीक्षण और तकनीकी जांच को एक साथ जोड़ा जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन स्थानों पर ध्वनि स्तर और उपकरणों की स्थापना से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है और किन स्थानों पर सुधार की जरूरत है।
राज्य स्तर के पुराने निर्देशों का भी हवाला
महापौर ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इस विषय में राज्य स्तर पर पहले भी दिशा-निर्देश जारी हुए थे और कार्रवाई भी की गई थी। उनके मुताबिक, यदि कहीं दोबारा ऊंचे लाउडस्पीकर लगाए गए हैं तो प्रशासन को एक बार फिर विस्तृत जांच करनी चाहिए। इस पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्थानीय स्तर पर त्वरित और समान रूप से लागू होने वाली कार्रवाई की मांग रखी।
इस घटनाक्रम को प्रशासनिक निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ध्वनि प्रदूषण पर पहले भी अभियान चलाए जा चुके हैं। अब फोकस उन स्थानों पर है जहां ऊंचाई, दिशा और ध्वनि प्रसारण का असर घनी आबादी वाले हिस्सों तक पहुंचने की शिकायतों में सामने आया है।

“जैसे बड़े डीजे और लाउडस्पीकर पर नियंत्रण के लिए कार्रवाई की जा रही है, वैसे ही ऊंची मीनारों पर लगे लाउडस्पीकरों पर भी नियमों के अनुरूप कदम उठाए जाएं। मैंने इस मुद्दे पर कलेक्टर को अवगत कराया है और जल्द कार्रवाई की अपेक्षा की है।” — पुष्यमित्र भार्गव, महापौर

फिलहाल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर निगाह है। शिकायतों के सत्यापन, नियमों की समीक्षा और क्षेत्रवार रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। शहर में ध्वनि नियंत्रण को लेकर यह बहस अब परीक्षा काल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक सुविधा के साझा संदर्भ में आगे बढ़ती दिख रही है।