Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने स्कूल शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव लागू किया है। राज्य में राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत निजी स्कूलों में मुफ्त प्रवेश की व्यवस्था अब पहले की तुलना में व्यापक कर दी गई है।
नए प्रावधान के बाद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्रवेश के लिए अधिक कक्षाओं में विकल्प मिलेगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से प्रवेश प्रक्रिया अधिक उपयोगी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनेगी।
नए नियम के तहत अब निजी स्कूलों में RTE प्रवेश केवल सीमित स्तर तक नहीं रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नर्सरी (प्री-प्राइमरी 3+), एलकेजी (प्री-प्राइमरी 4+), यूकेजी (प्री-प्राइमरी 5+) और पहली कक्षा में मुफ्त प्रवेश की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इससे उन अभिभावकों को राहत मिलेगी जो अब तक प्रवेश स्तर के सीमित विकल्पों के कारण आवेदन नहीं कर पा रहे थे या अपने बच्चे की उम्र के अनुसार सही कक्षा नहीं चुन पा रहे थे।
पहले कई मामलों में अभिभावकों के सामने केवल नर्सरी या पहली कक्षा जैसे सीमित विकल्प रहते थे। अब एलकेजी और यूकेजी को भी शामिल किए जाने से प्रवेश का रास्ता विस्तृत हुआ है। शिक्षा विभाग के इस संशोधन का सीधा असर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उन परिवारों पर पड़ेगा, जहां निजी स्कूलों में शुरुआती कक्षाओं के लिए फीस अधिक रहती है और सामान्य परिवारों के लिए यह बड़ा खर्च बनता है।
आवेदन प्रक्रिया और चयन की तिथि
RTE के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू की जाएगी। आवेदन की अंतिम तिथि के बाद 6 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी। चयन पूरी तरह लॉटरी प्रणाली के आधार पर होगा, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे। जिस बच्चे का नाम लॉटरी में आएगा, उसे निर्धारित नियमों के अनुसार स्कूल आवंटित किया जाएगा।
यह व्यवस्था इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि प्रवेश में मानवीय हस्तक्षेप कम होता है और सीट आवंटन प्रणाली एक समान तरीके से लागू होती है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आयु मानदंडों का पालन अनिवार्य रहेगा, जिससे आवेदन के समय कक्षा निर्धारण में भ्रम कम हो सके।
कक्षा-वार आयु सीमा तय
शिक्षा विभाग ने कक्षा-वार आयु सीमा भी अधिसूचित की है। नर्सरी के लिए आयु 3 से 4 वर्ष, एलकेजी के लिए 4 से 5 वर्ष, यूकेजी के लिए 5 से 6 वर्ष और पहली कक्षा के लिए 6 से 7 वर्ष तय की गई है। इस स्पष्टता से अभिभावकों को आवेदन से पहले यह समझने में आसानी होगी कि उनका बच्चा किस स्तर के लिए पात्र है।
आयु सीमा तय होने से स्कूलों और अभिभावकों के बीच दस्तावेजी जांच का काम भी सरल होगा। प्रवेश के दौरान आयु सत्यापन एक प्रमुख चरण होता है, इसलिए इस मानक से समय पर जांच और सूची तैयार करने में प्रशासनिक सुविधा मिलेगी।
सीट निर्धारण का नया फॉर्मूला
सरकार ने RTE सीटों की गणना के लिए नया तरीका भी लागू किया है। इसके अनुसार संबंधित स्कूल में पिछले तीन वर्षों के प्रवेश का औसत आधार बनेगा। कुल निर्धारित सीटों में से 25 प्रतिशत सीटें RTE के तहत मुफ्त प्रवेश के लिए आरक्षित रहेंगी। इस नियम का उद्देश्य सीट निर्धारण को डेटा आधारित बनाना है, ताकि हर स्कूल में वास्तविक प्रवेश क्षमता के अनुसार आरक्षण लागू हो।
यदि किसी कक्षा में पहले से पढ़ रहे बच्चों को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया गया है, तो नई प्रवेश प्रक्रिया शेष उपलब्ध सीटों पर ही लागू होगी। यानी सीटों का उपयोग चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और खाली क्षमता का समुचित प्रबंधन किया जाएगा। इससे अनावश्यक ओवरबुकिंग या सीटों के गलत आकलन जैसी समस्याएं कम होने की संभावना है।
खाली सीटों पर भी अब प्रवेश
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खाली सीटों का उपयोग है। अक्सर शुरुआती कक्षाओं में प्रवेश लेने के बाद कुछ विद्यार्थी बीच सत्र या अगले सत्र में स्कूल छोड़ देते हैं, जिससे ऊपरी प्री-प्राइमरी स्तर पर सीटें खाली रह जाती हैं। अब ऐसे मामलों में बची हुई सीटों पर भी RTE के माध्यम से प्रवेश दिया जा सकेगा।
इस प्रावधान से दो स्तर पर असर दिखेगा। पहला, अधिक बच्चों को मुफ्त शिक्षा योजना का लाभ मिल सकेगा। दूसरा, निजी स्कूलों में उपलब्ध सीटों का बेहतर उपयोग होगा और ऐसी सीटें खाली नहीं रहेंगी, जिन पर पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा सकता है।
कुल मिलाकर, राजस्थान सरकार का यह निर्णय RTE प्रवेश प्रणाली को अधिक व्यापक, चरणबद्ध और स्पष्ट बनाने की दिशा में देखा जा रहा है। आवेदन तिथियों, आयु मानदंड, लॉटरी चयन और सीट गणना के नए नियमों के साथ अब अभिभावकों के पास पहले से ज्यादा विकल्प होंगे। आने वाले प्रवेश चक्र में इस बदलाव का प्रभाव सीधे तौर पर निचली कक्षाओं में दाखिले के पैटर्न पर दिखने की उम्मीद है।