मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए क्षीर धारा ग्राम योजना शुरू कर दी गई है। जिले में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इसी सिलसिले में 16 फरवरी 2026 को कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन सहित पशुपालन, उद्यानिकी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का फोकस यह रहा कि योजना को तय समय-सारिणी के अनुसार लागू किया जाए और हर विभाग अपनी भूमिका स्पष्ट रूप से निभाए।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना को केवल कागजी स्तर पर न रखकर गांव स्तर तक सक्रिय रूप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल पशुओं की संख्या नहीं, बल्कि पशुओं की उत्पादक क्षमता और स्वास्थ्य पर भी समान रूप से काम जरूरी है।
डेयरी लाइवस्टॉक मिशन के साथ एकीकृत क्रियान्वयन
जिला प्रशासन ने बताया कि जिले में डेयरी लाइवस्टॉक मिशन के अंतर्गत पशुधन का पंजीयन जारी है। क्षीर धारा ग्राम अभियान को इसी प्रक्रिया से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि गांवों में पशुधन का आधारभूत डेटा उपलब्ध रहे और लक्षित हस्तक्षेप किए जा सकें।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता, पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग प्राथमिकता में रहेगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि टीकाकरण और नस्ल सुधार से जुड़े कार्यक्रमों की प्रगति नियमित रूप से मॉनिटर की जाए।
“योजना का क्रियान्वयन समयबद्ध कार्यक्रम के अनुसार सुनिश्चित किया जाए और सभी विभाग समन्वय के साथ काम करें।” — शिवम वर्मा, कलेक्टर
प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों पर भी फोकस
समीक्षा बैठक में यह भी तय किया गया कि प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को पशुपालन एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से अधिकतम जोड़ा जाए। प्रशासन का मानना है कि इस समन्वित मॉडल से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की भूमिका मजबूत होगी।
कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप जिले में पशुपालन आधारित आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। इसके लिए विभागीय जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं और लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में रणनीति स्तर पर यह भी देखा गया कि ग्राम स्तर के अभियान, पंजीयन, स्वास्थ्य सेवाएं, चारा प्रबंधन और नस्ल सुधार जैसे घटकों को एक साथ लागू किए बिना अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। इसलिए संबंधित विभागों को साझा मॉनिटरिंग ढांचा अपनाने का निर्देश दिया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार, आने वाले चरणों में फील्ड स्तर पर प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि योजना के उद्देश्यों—दुग्ध उत्पादन वृद्धि, पशु स्वास्थ्य संरक्षण और आजीविका सुदृढ़ीकरण—को समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके।