इंदौर-बरेली महाकाल एक्सप्रेस अब LHB कोच में: इंदौर-मुंबई तेजस 28 मार्च तक बढ़ी

इंदौर जंक्शन से संचालित होने वाली महाकाल एक्सप्रेस में अब लिंक हॉफमैन बुश यानी एलएचबी कोच लगाए जा रहे हैं। रेलवे प्रशासन ने रैक परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी कर ली है और बुधवार से ट्रेन नई संरचना के साथ चलेगी। इस बदलाव के साथ इंदौर से बनकर चलने वाली 11 ट्रेनों में यह तीसरी ट्रेन हो गई है, जिसमें एलएचबी रैक लगाई गई है।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक पहले इस सेवा में 23 आईसीएफ कोच लगाए जाते थे, जबकि अब 17 एलएचबी कोच के साथ संचालन होगा। बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनल खंड में चलने वाली रैक वापसी में महाकाल एक्सप्रेस में लगती है, इसलिए इस ट्रेन में भी अब एलएचबी कोच मिलने लगेंगे। इससे पहले आला हजरत एक्सप्रेस और बरेली-लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस को भी एलएचबी कोच में बदला जा चुका है।

महाकाल एक्सप्रेस का समय और प्रमुख रूट

महाकाल एक्सप्रेस हर बुधवार सुबह 11:25 बजे बरेली जंक्शन से रवाना होती है। यह ट्रेन आंवला, चंदौसी, बहजोई, बबराला, अलीगढ़, आगरा फोर्ट, आगरा कैंट, ग्वालियर, झांसी, विदिशा और उज्जैन होते हुए अगले दिन सुबह 8:55 बजे इंदौर पहुंचती है। वापसी में 14319 महाकाल एक्सप्रेस इंदौर से शाम 4:45 बजे चलती है और दूसरे दिन दोपहर 3:20 बजे बरेली पहुंचती है।

रेलवे का कहना है कि उज्जैन, इंदौर, आगरा, ग्वालियर और झांसी जाने वाले यात्रियों को इस बदलाव का सीधा लाभ मिलेगा। खासकर लंबी दूरी की यात्रा में कोच डिज़ाइन, झटकों में कमी और स्थिरता जैसे बिंदुओं पर सुधार दिखाई देगा।

एलएचबी कोच क्यों अहम माने जाते हैं

एलएचबी कोच स्टेनलेस स्टील बॉडी से बने होते हैं और इनमें एंटी-क्लाइंबिंग फीचर दिया जाता है। दुर्घटना की स्थिति में कोच एक-दूसरे पर चढ़ने की आशंका कम होती है, जिससे जान-माल के नुकसान का जोखिम घटता है। इन कोचों में बेहतर सस्पेंशन, ज्यादा स्पीड क्षमता और अधिक यात्री क्षमता जैसे तकनीकी लाभ भी बताए जाते हैं।

रेलवे नेटवर्क में आईसीएफ से एलएचबी कोच की ओर बदलाव पहले से चल रहा है। महाकाल एक्सप्रेस में यह परिवर्तन उसी क्रम की अगली कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि यह सेवा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई प्रमुख शहरों को जोड़ती है।

इंदौर-मुंबई तेजस एक्सप्रेस के फेरे फिर बढ़े

इंदौर और मुंबई के बीच चलने वाली सेमी हाईस्पीड तेजस एक्सप्रेस के फेरे भी रेलवे ने बढ़ा दिए हैं। अब यह सेवा 28 मार्च तक विस्तारित कर दी गई है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार फेरे बढ़ने से वीकेंड पर भी कन्फर्म टिकट की उपलब्धता में राहत मिली है और दुरंतो व अवंतिका जैसी ट्रेनों पर दबाव घटा है।

परिचालन आंकड़ों के अनुसार तेजस एक्सप्रेस में अधिकांश दिनों में करीब 75 फीसदी सीटें भरी चल रही हैं। रेलवे विशेषज्ञों का आकलन है कि अवंतिका और दुरंतो एक्सप्रेस में पहले जहां लगभग 160 फीसदी तक दबाव देखा जाता था, वह अब करीब 40 फीसदी तक कम हुआ है।

रेलवे ने यह सेवा जुलाई में शुरू की थी। नए साल के दौरान पहले भी इसके फेरे बढ़ाए गए थे। रेलवे पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया था कि यात्रियों की मांग को देखते हुए मुंबई से इंदौर के लिए सेवा 30 जनवरी तक और इंदौर से मुंबई के लिए 31 जनवरी तक बढ़ाई गई थी। अब इसे आगे बढ़ाकर मार्च अंत तक संचालित करने का फैसला लागू किया गया है।

तेजस स्पेशल का मौजूदा शेड्यूल

ट्रेन 09085 मुंबई सेंट्रल-इंदौर स्पेशल प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मुंबई सेंट्रल से रात 11:20 बजे रवाना होती है और अगले दिन दोपहर 1:00 बजे इंदौर पहुंचती है। ट्रेन 09086 इंदौर-मुंबई सेंट्रल स्पेशल मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को इंदौर से शाम 5:00 बजे चलती है और अगले दिन सुबह 7:10 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचती है।

दोनों दिशाओं में ट्रेन का ठहराव बोरिवली, वापी, सूरत, वडोदरा, दाहोद, रतलाम और उज्जैन स्टेशनों पर है। इसमें फर्स्ट एसी, एसी 2-टियर और एसी 3-टियर कोच उपलब्ध हैं। रेलवे का संकेत है कि मांग बनी रही तो आगे भी परिचालन समीक्षा जारी रहेगी।