इंदौर दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बांटे स्वर्ण-रजत पदक

Indore News: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल और कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने शोधार्थियों को स्वर्ण और रजत पदक प्रदान किए। विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संकेत है।
समारोह में पद्मश्री नारायण व्यास, सांसद शंकर लालवानी, कुलपति डॉ. राकेश सिंघई और कुलसचिव प्रज्वल खरे सहित अकादमिक जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को राजनीतिक शुचिता, महिला सशक्तिकरण और लोकसेवा की त्रिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई ने जनकल्याण के कई काम किए और गुजरात के जूनागढ़ से आए 60 परिवारों को बसाकर रोजगार व बेहतर जीवन दिया। उनके अनुसार, इसी कारण तीन शताब्दियों बाद भी अहिल्याबाई को समाज सेवा के कार्यों के लिए याद किया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास की गति तेज कर रहा है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में उच्च शिक्षण संस्थानों की प्रमुख भूमिका रहेगी। राज्यपाल ने कहा कि इस दिशा में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और सामाजिक पहलों को साथ लेकर चल रहा है।

“उपाधि कागज का टुकड़ा नहीं है। यह समाज और राष्ट्र को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है।” — मंगुभाई पटेल

विद्यार्थियों को संदेश: सच बोलें, मर्यादा रखें, गुरुजनों का सम्मान करें
दीक्षांत समारोह में पदक और उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे जीवन में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद झूठ का सहारा न लें। उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने तथा अनुशासित जीवन अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कठिन समय में भी सत्य और कर्तव्य का मार्ग ही स्थायी परिणाम देता है।

राज्यपाल ने अपने वक्तव्य में रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा नहीं छोड़ी और माता-पिता के आदेश का पालन किया। उनके अनुसार, भारतीय परंपरा के ऐसे उदाहरण विद्यार्थियों को निर्णय और आचरण दोनों में संतुलन सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन और करियर में मूल्यों की भूमिका हमेशा केंद्रीय रहनी चाहिए।
दीक्षांत में बेटियों की भागीदारी, अकादमिक उपलब्धियों पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि इस बार उपाधि प्राप्त करने वालों में लड़कों की तुलना में बेटियों की संख्या अधिक रही। उन्होंने इसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का सकारात्मक परिणाम बताया। उनके मुताबिक, उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है और इसे संस्थागत समर्थन के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इंदौर का यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रहा है और यहां से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उच्च संस्थानों में प्लेसमेंट मिल रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण और जागरूकता से जुड़ी पहलों को भी सराहनीय बताया।

“विद्यार्थी लक्ष्य तय करें और उसे पाने में पूरी शक्ति लगाएं। पढ़ाई ऐसी हो कि रोजगार खुद आए।” — पद्मश्री नारायण व्यास

पद्मश्री नारायण व्यास ने विद्यार्थियों से कहा कि वे जीवन में निराशा से बचें, विनम्र बने रहें और माता-पिता व आचार्य के मार्गदर्शन का पालन करें। उन्होंने जड़ों से जुड़े रहने और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देने की बात कही। सांसद शंकर लालवानी ने भी उपाधिधारकों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि विकसित भारत 2047 की यात्रा में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भूमिका अहम रहेगी।
नई शिक्षा नीति, समय पर परीक्षा-परिणाम और डिजिटलीकरण
कुलपति डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन, खेल और कला क्षेत्रों में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत कई नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिससे छात्रों को पढ़ाई के साथ रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय को नैक से A+ ग्रेड प्राप्त है।
डॉ. सिंघई ने कहा कि संस्थान समय पर परीक्षाएं कर रहा है और परिणाम भी निर्धारित समय में जारी किए जा रहे हैं। डिजिटलीकरण का काम जारी है, जिससे विद्यार्थियों को शिक्षा संबंधी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को कर्तव्य पालन, देश सेवा और माता-पिता व गुरुजनों की आज्ञा का सम्मान करने की प्रतिज्ञा दिलाई।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय इंदौर, धार, झाबुआ, खंडवा और अलीराजपुर सहित जनजातीय अंचलों में सिकल सेल एनीमिया जागरूकता पर सतत काम कर रहा है। वनवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के साथ चिकित्सा सहयोग के प्रयास भी जारी हैं। कार्यक्रम में पूर्व कुलपति, प्राचार्य, प्रोफेसर, कार्य परिषद के सदस्य, विद्यार्थी और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इंदौर की स्वच्छता पर शोध करने वाले पत्रकार शोधार्थी की सराहना
समारोह के दौरान राज्यपाल ने इंदौर की स्वच्छता पर शोध करने वाले पत्रकार शोधार्थी जितेंद्र जाखेटिया की विशेष सराहना की। उनका शोध इंदौर में स्वच्छता की आदत और व्यवहार निर्माण की प्रक्रिया पर केंद्रित है। शोध में शहर में स्वच्छता जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। यह कार्य जनसंचार अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरगुंदे के निर्देशन में पूरा हुआ।