इंदौर जनसुनवाई: कलेक्टर शिवम वर्मा ने थैलेसीमिया बच्चों की दवा बहाल कराई, फूल और चॉकलेच देकर बच्चों ने जताया आभार 

Indore News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के तहत इंदौर में हर मंगलवार होने वाली जनसुनवाई में इस बार भी त्वरित समाधान के कई उदाहरण सामने आए। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सुनवाई में स्वास्थ्य, परिवहन और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों पर मौके पर कार्रवाई की गई।
जिन प्रकरणों का तत्काल निपटारा संभव नहीं होता, उनके लिए समय-सीमा तय की जा रही है और हर सोमवार समीक्षा की जा रही है।

जिला प्रशासन के अनुसार मंगलवार की सुनवाई में कई आवेदक अपनी समस्याओं के समाधान के बाद धन्यवाद देने भी पहुंचे। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि जनसुनवाई केवल शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया न रहे, बल्कि तय समय में परिणाम देने वाली प्रणाली के रूप में चले। प्रशासन ने यह भी दोहराया कि स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
थैलेसीमिया बच्चों की दवा आपूर्ति पर तत्काल निर्णय
जनसुनवाई के दौरान थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों ने दवाओं और इंजेक्शन की उपलब्धता में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। कलेक्टर शिवम वर्मा ने अपने कक्ष में परिवारों से अलग से मुलाकात की और उसी समय संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आगे दवा आपूर्ति निरंतर रखी जाएगी, ताकि मरीजों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

परिजनों ने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उन्हें निशुल्क दवाएं मिल रही हैं और नियमित आपूर्ति उनके लिए जरूरी है। इस पर कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों को स्टॉक, ऑर्डर और वितरण की समयबद्ध व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया कि उपचार से जुड़े मामलों में विलंब सीधे स्वास्थ्य पर असर डालता है, इसलिए समन्वय बेहतर किया जाए।

व्यवस्था को नियमित रखने के लिए थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में से वैभव सोनी को नोडल बनाया गया है। वैभव सोनी दवा उपलब्धता और परिवारों के साथ समन्वय का कार्य देखेंगे। जिला प्रशासन ने कहा कि संबंधित टीम नियमित मॉनिटरिंग करेगी, ताकि समय पर ऑर्डर और वितरण सुनिश्चित रहे और किसी मरीज की डोज प्रभावित न हो।

ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हुई आरोही ने जताया आभार
जनसुनवाई में आरोही नाम की बालिका अपनी माता के साथ कलेक्टर से मिलने पहुंची। जन्म से आंख के ऊपर गांठ होने के कारण उसे ऑपरेशन की आवश्यकता थी। जिला प्रशासन की मदद से उसका ऑपरेशन कराया गया। उपचार के बाद स्वस्थ स्थिति में पहुंची बालिका को देखकर कलेक्टर ने संतोष जताया और उसके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। फूल और चॉकलेच देकर बच्चों ने कलेक्टर शिवम वर्मा का आभार जताया।

प्रशासन के अनुसार इस तरह के मामलों में मेडिकल संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है, ताकि जरूरी उपचार जल्दी हो सके। जनसुनवाई के माध्यम से पहचाने गए गंभीर स्वास्थ्य प्रकरणों को अलग से ट्रैक किया जा रहा है। इससे जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता मिल सके और उपचार की प्रक्रिया में देरी कम हो।
दो वर्ष से लंबित वाहन रजिस्ट्रेशन दस्तावेज भी जारी
एक अन्य मामले में वाहन स्वामी को दो साल से लंबित रजिस्ट्रेशन कार्ड दिलाया गया। आवेदक ने बताया कि उसने दो वर्ष पहले एक ऑटो डीलर से लोडिंग रिक्शा खरीदी थी, लेकिन डीलर की लापरवाही से रजिस्ट्रेशन दस्तावेज नहीं मिल सके। जनसुनवाई में आवेदन आते ही कलेक्टर के निर्देश पर सहायक परिवहन अधिकारी ने मौके से ही डीलर से मोबाइल पर बात की और दस्तावेज जारी करवाए।
आवेदक ने त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन और जिला प्रशासन की कार्यवाही का आभार जताया। प्रशासन ने कहा कि परिवहन से जुड़े लंबित मामलों में भी जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि नागरिकों को बुनियादी दस्तावेजों के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

“मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनसुनवाई के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो, विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा के मामलों में तत्काल सहायता दी जाए।” — शिवम वर्मा, कलेक्टर

कलेक्टर ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनका स्वस्थ रहना जरूरी है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जरूरतमंदों को समय पर उपचार, सहायता और जरूरी सेवाएं मिलें, ताकि वे शिक्षा, खेल और जीवन के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें।

जनसुनवाई में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन, अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पंवार, रिंकेश वैश्य सहित अन्य अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों का हाथों-हाथ निराकरण किया। प्रशासन के मुताबिक इस सत्र में अधिकतर मामले पारिवारिक विवाद, जमीन विवाद और संपत्ति विवाद से जुड़े रहे।