इंदौर स्थित इंडेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने 45 वर्षीय महिला की जटिल सर्जरी कर 4 किलो वजनी ओवरी ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। अस्पताल के अनुसार ट्यूमर का आकार 12x12x17 सेंटीमीटर था और मरीज पिछले करीब दो वर्षों से पेट में बढ़ती गांठ, सूजन और लगातार असहजता से परेशान थी। सर्जरी करीब तीन घंटे चली और इसके बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार दर्ज किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि ऑपरेशन वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रितिका मालवीय की अगुवाई में किया गया। एनेस्थीसिया विभाग और अन्य विशेषज्ञों की टीम भी प्रक्रिया में शामिल रही। चिकित्सकीय टीम के मुताबिक यह मामला आकार, स्थिति और संभावित जोखिमों की वजह से चुनौतीपूर्ण था, इसलिए जांच रिपोर्ट आने के बाद तत्काल ऑपरेशन की योजना बनाई गई।
दो साल से बढ़ रही थी समस्या, खाना-पानी तक हुआ मुश्किल
मरीज के परिजन राधेश्याम ने बताया कि महिला, जो ग्राम पिपल्दा की निवासी हैं, लंबे समय से पेट में सूजन और दर्द से जूझ रही थीं। हालत यहां तक पहुंच गई थी कि भोजन करने और पानी पीने में कठिनाई होने लगी थी। परिजन के अनुसार कुछ भी खाने या पीने पर उल्टी हो जाती थी। परिवार ने कई जगह इलाज कराया, लेकिन विशेष लाभ नहीं मिला। बाद में परामर्श के बाद इंडेक्स अस्पताल में विस्तृत जांच कराई गई।
डॉ. रितिका मालवीय के अनुसार शारीरिक परीक्षण, अल्ट्रासोनोग्राफी और सीटी स्कैन में दाईं ओवरी में बड़ा ट्यूमर मिला, जो धीरे-धीरे आकार बढ़ा रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि ट्यूमर का आकार इतना बढ़ चुका था कि पेट के अन्य अंगों पर दबाव पड़ने लगा था। इसी कारण मरीज में पेट फूलना, असुविधा और उल्टी जैसे लक्षण बढ़ते गए।
केवल 1-1 सेमी के चार चीरे, लैप्रोस्कोपी से निकाला ट्यूमर
चिकित्सकीय टीम ने बताया कि इतने बड़े सीरस सिस्टेडेनोमा ट्यूमर को लेप्रोस्कोपी और एंडोसुचरिंग तकनीक से निकाला गया। यह प्रक्रिया पेट पर केवल 1-1 सेंटीमीटर के चार छोटे चीरों से की गई। डॉक्टरों के अनुसार बड़े आकार के ट्यूमर में इस तरह की मिनिमली इनवेसिव सर्जरी तकनीकी रूप से संवेदनशील होती है, क्योंकि ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से निकालना और आसपास के अंगों की रक्षा करना साथ-साथ जरूरी रहता है।
“यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता, तो आगे चलकर इसके कैंसर में बदलने की आशंका बनी रहती। ट्यूमर फटने की स्थिति भी गंभीर हो सकती थी।” — डॉ. रितिका मालवीय
अस्पताल के मुताबिक ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और चिकित्सकीय निगरानी के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टरों ने कहा कि समय पर जांच, सही निदान और विशेषज्ञ टीम की समन्वित तैयारी इस सफलता के प्रमुख कारण रहे।
अस्पताल प्रबंधन ने टीमवर्क को बताया सफलता का आधार
मयंक वेलफेयर सोसायटी के चेयरमैन सुरेशसिंह भदौरिया ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान जटिल मामलों में भी उपचार उपलब्ध करा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. स्वाति प्रशांत ने भी पूरी टीम को बधाई दी और इसे विशेषज्ञता व टीमवर्क का उदाहरण बताया।
“यह ऑपरेशन टीमवर्क और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण है।” — डॉ. स्वाति प्रशांत