21 हजार करोड़ की मेगा योजना, एमपी के 55 जिलों में होगा व्यापक विकास, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार

मध्य प्रदेश में विकास कार्यों को जिला स्तर पर तेज करने के लिए सरकार ने बड़ा वित्तीय खाका तैयार किया है। राज्य के 55 जिलों में करीब 21 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं लागू की जानी हैं। इस पैकेज का लक्ष्य अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के मुताबिक काम करना और विकास के अंतर को कम करना बताया गया है।

सरकारी योजना के अनुसार, परियोजनाओं को एक साथ शुरू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसमें उन कामों को पहले आगे बढ़ाने की रणनीति है, जिनका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को इस मॉडल का मुख्य आधार माना गया है।

जिला आधारित विकास मॉडल पर जोर

राज्य स्तर की एकरूप योजना के बजाय जिला आधारित प्राथमिकताओं को महत्व दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि हर जिले की जरूरत, भौगोलिक स्थिति और मौजूदा ढांचे को देखकर परियोजनाओं का चयन किया जाएगा। जिन इलाकों में बुनियादी सुविधाएं अपेक्षाकृत कम हैं, वहां निवेश का अनुपात अधिक रखा जा सकता है।

प्रशासनिक स्तर पर इस प्रक्रिया में प्रस्ताव तैयार करना, तकनीकी मंजूरी, लागत आकलन और क्रियान्वयन की समय-सीमा तय करना शामिल है। सरकार की तरफ से संकेत है कि परियोजनाओं को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि प्रगति की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।

किन क्षेत्रों पर रहेगा खर्च

21 हजार करोड़ रुपये के इस पैमाने का उपयोग आमतौर पर उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां सार्वजनिक निवेश से व्यापक असर पड़ता है। इसमें सड़क, पेयजल, नगरीय सुविधाएं, ग्रामीण संपर्क, सार्वजनिक सेवाओं का स्थानीय ढांचा और जरूरी नागरिक सुविधाएं प्रमुख दायरे में मानी जा रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े पैमाने की जिला परियोजनाओं का वास्तविक असर तभी दिखता है जब स्थानीय संस्थाएं, विभागीय एजेंसियां और जमीनी निगरानी तंत्र एक साथ काम करें। इसी वजह से राज्य सरकार प्रशासनिक निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन को समान प्राथमिकता दे रही है।

वित्तीय आकार और क्रियान्वयन की चुनौती

55 जिलों के लिए 21 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान अपने आप में बड़ा हस्तक्षेप है। इतने बड़े बजट के साथ सबसे बड़ी चुनौती परियोजना प्रबंधन, तकनीकी मंजूरी की गति और समय पर भुगतान व्यवस्था होती है। सरकार की योजना में इन बिंदुओं पर संस्थागत निगरानी का प्रावधान रखा जा रहा है ताकि काम में देरी न हो।

जिला स्तर की परियोजनाओं में आमतौर पर दो समानांतर लक्ष्य होते हैं। पहला, आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूत करना। दूसरा, निर्माण और सेवा गतिविधियों के जरिए स्थानीय आर्थिक गति बढ़ाना। इसी कारण इस तरह के निवेश को सिर्फ बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा जाता है।

जनसेवा पर सीधे असर की उम्मीद

सरकार का फोकस उन कार्यों पर रखने का संकेत है जिनका परिणाम नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी में दिखे। सड़क संपर्क, पानी, स्थानीय नगरीय सेवाएं और सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं बेहतर होने पर जिला मुख्यालय से लेकर छोटे कस्बों तक प्रभाव दिखने की संभावना रहती है।

नीतिगत स्तर पर यह पहल इस बात का संकेत भी है कि राज्य विकास रणनीति में अब जिला-केंद्रित निवेश का हिस्सा बढ़ा रहा है। इससे ऐसे क्षेत्रों को भी गति मिल सकती है जो अब तक बड़े शहरी निवेश की तुलना में धीमी प्रगति में रहे हैं।

कुल मिलाकर, 55 जिलों में 21 हजार करोड़ रुपये की योजनाएं मध्य प्रदेश के लिए एक व्यापक विकास कार्यक्रम के रूप में देखी जा रही हैं। अब आगे की अहम कड़ी क्रियान्वयन, समीक्षा और तय समय में परियोजनाओं की जमीन पर प्रगति होगी।