इंदौर में 3000 से ज्यादा लोकेशन पर AI और संपदा-2 डेटा से तय होगी गाइडलाइन: 91 नई कॉलोनियां जुड़ीं

Indore News: इंदौर शहर और जिले में जमीन या मकान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अगले वित्त वर्ष में रजिस्ट्री खर्च बढ़ सकता है। शासन और स्थानीय स्तर पर हुए आकलन के बाद तीन हजार से अधिक लोकेशन पर गाइडलाइन दरें बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
इस प्रक्रिया के तहत उप पंजीयन कार्यालयों में प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से जिला और फिर केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा।
प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, उप पंजीयन कार्यालय इसी माह अपने-अपने प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति को भेजेंगे। जिला स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद इन प्रस्तावों को मार्च के मध्य तक केंद्रीय मूल्यांकन समिति के पास भेजा जाना है। अंतिम निर्णय के बाद नई गाइडलाइन दरें लागू होंगी, जिनका असर सीधे संपत्ति की रजिस्ट्री लागत पर पड़ेगा।
दरअसल, चालू वित्तीय वर्ष में हुई रजिस्ट्रियों का डेटा-आधारित विश्लेषण किया गया है। जिन क्षेत्रों में जमीन या निर्मित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त गाइडलाइन दर से अधिक कीमत पर हुई, वहां दर संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यानी जहां बाजार मूल्य लगातार गाइडलाइन से ऊपर दिखा, उन इलाकों को प्राथमिकता से बढ़ोतरी सूची में रखा गया है।
डेटा आधारित चयन: 3200 संभावित लोकेशन की जांच
इस बार प्रस्ताव तैयार करने में एआई और संपदा-2 सिस्टम के डेटा को आधार बनाया जा रहा है। शासन ने पिछले माह करीब 3200 लोकेशन पर संभावित बढ़ोतरी का इनपुट भेजा था। बाद की विस्तृत जांच में लगभग 2400 स्थान ऐसे पाए गए, जहां मूल्य अंतर 10 प्रतिशत से अधिक दर्ज हुआ। इसके अलावा करीब 600 स्थानों पर स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त बढ़ोतरी की स्थिति सामने आई।
विभागीय मानकों के अनुसार, इस चरण में उन्हीं लोकेशन को बढ़ोतरी प्रस्ताव में लिया जा रहा है जहां दस्तावेजी रुझान में 10 प्रतिशत से अधिक का अंतर दिखाई दिया। इसका उद्देश्य मनमाने संशोधन के बजाय रजिस्ट्री डेटा और वास्तविक लेनदेन के आधार पर दरों का निर्धारण करना है।
नई कॉलोनियों का दायरा बढ़ा, 91 को मंजूरी
चालू वित्तीय वर्ष के बीच में विभाग ने 100 से अधिक नई कॉलोनियों को गाइडलाइन में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था। इनमें से 91 कॉलोनियों को मंजूरी मिल चुकी है। इन स्वीकृत कॉलोनियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है और वहां रजिस्ट्रियां भी शुरू कर दी गई हैं। इससे पहले जिन कॉलोनियों में स्पष्ट गाइडलाइन नहीं थी, वहां अब निर्धारित दरों के साथ पंजीयन संभव हो रहा है।
आने वाले वित्त वर्ष में करीब 200 और नई लोकेशन गाइडलाइन दायरे में जोड़ी जा सकती हैं। इसके लिए विभाग ने आवेदन मांगे हैं। प्रस्तावित कॉलोनियों के लिए स्वीकृत नक्शा, रेरा पंजीयन और अन्य वैध अनुमतियां अनिवार्य रखी गई हैं। यानी केवल उन्हीं परियोजनाओं को शामिल किया जाएगा जिनकी दस्तावेजी स्थिति स्पष्ट और वैधानिक रूप से मान्य हो।
पिछले वित्त वर्ष का रुझान: 20 से 270 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
गाइडलाइन संशोधन का असर पिछले वित्त वर्ष में भी बड़े पैमाने पर देखा गया था। कई इलाकों में दरें 20 प्रतिशत से लेकर 270 प्रतिशत तक बढ़ाई गई थीं। सबसे ज्यादा वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि में दर्ज हुई थी। उस समय भी रजिस्ट्रियों में ऊंचे मूल्य और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विरोध जैसे कारकों को ध्यान में रखकर बदलाव किए गए थे।
इसी पृष्ठभूमि में मौजूदा संशोधन प्रक्रिया को देखा जा रहा है। प्रशासन का फोकस उन क्षेत्रों पर है जहां बाजार व्यवहार और मौजूदा गाइडलाइन में बड़ा अंतर लगातार दिखाई दे रहा है। इससे भविष्य में राजस्व अनुमान, रजिस्ट्री मूल्यांकन और लेनदेन पारदर्शिता पर सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
अंतिम रूप से नई दरें केंद्रीय मूल्यांकन समिति की मंजूरी के बाद लागू होंगी। तब तक खरीदारों, डेवलपर्स और संपत्ति सलाहकारों की नजर इस बात पर रहेगी कि किन माइक्रो-लोकेशन में कितना संशोधन किया जाता है। फिलहाल संकेत यही हैं कि शहर और जिले के बड़े हिस्से में अगले वित्त वर्ष से संपत्ति पंजीयन की लागत ऊपर जा सकती है।