एमपी विधानसभा बजट सत्र का पांचवां दिन, भागीरथपुरा प्रकरण पर गरमा सकता है सदन, ‘औकात’ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन तय

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को भोपाल में होने जा रहा है। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले राजनीतिक माहौल फिर गरम माना जा रहा है। पिछले दिनों की स्थिति को देखते हुए आज भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की आशंका है।

सत्र के शुरुआती चार दिनों में कई मुद्दों पर टकराव सामने आया था। विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मामलों पर घेरने की रणनीति अपनाई, जबकि सरकार ने अपने रुख का बचाव किया। इस खींचतान का असर कार्यवाही पर भी दिखा और समय-समय पर सदन का माहौल शोरगुल वाला रहा।

पांचवें दिन की कार्यवाही में प्रश्नकाल और शून्यकाल सबसे अहम माने जा रहे हैं। आम तौर पर इसी दौरान विपक्ष सीधे सवालों के जरिए सरकार पर दबाव बनाता है। सरकार की ओर से संबंधित विभागों के मंत्री जवाब देंगे, जिससे सदन में बहस का स्तर और तेज हो सकता है।

आज की रणनीति पर सबकी नजर

विपक्ष की तैयारी इस बात पर केंद्रित मानी जा रही है कि किन मुद्दों को प्राथमिकता देकर सरकार को घेरा जाए। दूसरी ओर, सत्तापक्ष का प्रयास रहेगा कि कार्यवाही नियोजित ढंग से आगे बढ़े और बजट सत्र का एजेंडा बाधित न हो। विधानसभा के भीतर दोनों पक्षों के मुख्य सचेतक और वरिष्ठ सदस्य अपने-अपने विधायकों के साथ लगातार समन्वय में हैं।

सत्र के इस चरण में सरकार के लिए यह जरूरी है कि वित्तीय और नीतिगत कार्यवाही बिना ज्यादा व्यवधान पूरी हो। विपक्ष के लिए यह अवसर है कि वह रिकॉर्ड पर अपने सवाल दर्ज कराए। ऐसे में हर पल का राजनीतिक संदेश विधानसभा से बाहर भी जाएगा।

पिछले चार दिन क्यों रहे अहम

बजट सत्र की शुरुआती बैठकों ने साफ किया कि इस बार बहसें सीधी और टकरावपूर्ण रह सकती हैं। विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग रखी और कई बार विरोध दर्ज कराया। सरकार ने जवाब में कहा कि सभी विषय नियमों के तहत लिए जा सकते हैं और सदन का समय बाधित नहीं होना चाहिए।

कार्यवाही के दौरान बार-बार बढ़ते शोर के कारण अध्यक्षीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी। इसी पृष्ठभूमि में पांचवें दिन की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे आगे के दिनों का स्वर तय होगा। अगर शुरुआत से ही माहौल नियंत्रित रहा तो सत्र की उत्पादकता बढ़ सकती है।

बजट सत्र के व्यापक मायने

बजट सत्र केवल वित्तीय प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं और विपक्ष की राजनीतिक दिशा को भी सामने लाता है। विभागवार अनुदान, नीतिगत घोषणाएं, योजनाओं की समीक्षा और जवाबदेही, इन सभी पर सदन में चर्चा होती है। इसलिए हर दिन की कार्यवाही का प्रशासनिक और राजनीतिक असर अलग-अलग स्तर पर दिखता है।

विधानसभा की बहसों का प्रभाव जिलों तक जाता है, क्योंकि स्थानीय मुद्दे भी अक्सर सदन में उठते हैं। ऐसे में यह उम्मीद रहती है कि टकराव के बीच भी प्रश्नों के जवाब और नीतिगत स्पष्टता सामने आए। आज की बैठक में भी यही चुनौती होगी कि बहस हो, लेकिन कार्यवाही आगे बढ़े।

आगे क्या देखना होगा

पांचवें दिन का सबसे बड़ा संकेत यह रहेगा कि क्या सदन में संवाद और विरोध के बीच संतुलन बन पाता है। अगर बार-बार व्यवधान हुआ तो महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा सीमित हो सकती है। यदि कार्यवाही सुचारु रही तो सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष को विस्तार से रखने की स्थिति में होंगे।

फिलहाल राजनीतिक संकेत यही हैं कि दिन की शुरुआत से ही सदन में कड़ा रुख देखने को मिल सकता है। अब नजर इस पर रहेगी कि अध्यक्षीय संचालन, दलों की रणनीति और सदन का अनुशासन मिलकर बजट सत्र को किस दिशा में ले जाते हैं।