विधानसभा के बजट सत्र का पांचवां दिन सामान्य कार्यवाही के साथ शुरू हुआ, लेकिन प्रश्नकाल के दौरान माहौल हल्का-फुल्का हो गया। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर हास्य अंदाज में टिप्पणी की और कहा कि आज वे बदले-बदले नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदन का माहौल भी कुछ अलग दिखाई दे रहा है।
शेखावत की टिप्पणी पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तुरंत जवाब दिया। उन्होंने होली का संदर्भ लेते हुए कहा कि अब किसी की बर्बादी के आसार नहीं हैं। उन्होंने सदन में कहा कि त्योहार का समय है और सभी को खुश रहना चाहिए। साथ ही रिश्तों में मिठास और मुस्कान बनाए रखने की बात भी रखी।
“किसी की बर्बादी के आसार नहीं हैं, होली का त्योहार आ रहा है, सभी को खुश रहना चाहिए।” — कैलाश विजयवर्गीय
अध्यक्ष की टिप्पणी के बाद बढ़ा हास्य
इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी चुटीले अंदाज में हस्तक्षेप किया। उन्होंने इंदौर में होली के समय होने वाले ‘मूर्ख सम्मेलन’ का जिक्र करते हुए भंवर सिंह शेखावत से उनकी भूमिका पूछी। अध्यक्ष की इस टिप्पणी के बाद सदन का माहौल और हल्का हो गया।
अध्यक्ष की बात पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले से ही इस भूमिका में हैं, उन्हें बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह टिप्पणी आते ही सदन में हंसी सुनाई दी और कई सदस्य मुस्कुराते नजर आए।
“जो पहले से ही इस भूमिका में हैं, उन्हें बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती।” — कैलाश विजयवर्गीय
शेखावत का जवाब और सदन की प्रतिक्रिया
कैलाश विजयवर्गीय के जवाब पर भंवर सिंह शेखावत ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हंसते हुए कहा कि वहां ‘बाजार बट्टू सम्मेलन’ होता है और उसमें विजयवर्गीय हर बार नए रूप में आते हैं। शेखावत ने यह भी जोड़ा कि वे किसी दूसरे को यह भूमिका निभाने का मौका नहीं देते।
इसके बाद अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या होली पर होने वाले ‘मूर्ख सम्मेलन’ में भंवर सिंह शेखावत को नहीं बुलाया जाता। इस पर विजयवर्गीय ने फिर तुरंत जवाब दिया और कहा कि वे तो पहले से ही हैं, इसलिए उन्हें बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस पूरे आदान-प्रदान के दौरान सदन में ठहाके गूंजते रहे।
त्योहार से पहले राजनीतिक नोकझोंक की नरम तस्वीर
सदन की कार्यवाही के बीच यह संवाद ऐसे समय हुआ, जब होली नजदीक है और बजट सत्र जारी है। आमतौर पर प्रश्नकाल में सरकार और विपक्ष के बीच तीखे सवाल-जवाब देखने को मिलते हैं, लेकिन इस मौके पर दोनों पक्षों के नेताओं ने हल्के अंदाज में संवाद किया। इसमें अध्यक्ष की भागीदारी ने भी माहौल को सहज बनाया।
विधानसभा की राजनीति में इस तरह के क्षण अक्सर दर्ज होते हैं, जब तीखी बहसों के बीच रिश्तों की एक अलग तस्वीर सामने आती है। इस घटनाक्रम में भी राजनीतिक मतभेद अपनी जगह रहे, लेकिन संवाद का स्वर हास्यप्रधान रहा।
पृष्ठभूमि: पुराने राजनीतिक रिश्तों का संदर्भ
सदन में हुई इस नोकझोंक के साथ पुराने राजनीतिक संदर्भ भी चर्चा में आए। पहले के दौर में कैलाश विजयवर्गीय के राजनीतिक शुरुआती समय में कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका मानी जाती रही है, जिनमें भंवर सिंह शेखावत का नाम भी लिया जाता रहा। यह भी कहा जाता रहा कि एक समय क्षेत्रीय राजनीति में शेखावत का प्रभाव अलग तरह से दिखता था।
मौजूदा सत्र में हुई यह बातचीत इसी पृष्ठभूमि के साथ देखी गई, जहां पुराने रिश्तों और वर्तमान राजनीतिक भूमिकाओं का उल्लेख हल्के अंदाज में सामने आया। कुल मिलाकर, बजट सत्र के पांचवें दिन प्रश्नकाल में होली से पहले का यह प्रसंग सदन की औपचारिक कार्यवाही के बीच एक अलग दृश्य बनकर उभरा।