मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मौसम बदलने के साथ संक्रमणजन्य बीमारी के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे मरीज अधिक पहुंच रहे हैं, जिनमें तेज बुखार, गले में दर्द, लगातार खांसी, शरीर दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिख रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों का पैटर्न कई मामलों में कोरोना संक्रमण जैसा लगता है, लेकिन सभी मरीज कोविड पॉजिटिव नहीं होते।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस समय वायरल संक्रमण, श्वसन तंत्र की एलर्जी और फेफड़ों से जुड़ी परेशानी एक साथ देखने को मिल रही है। खासतौर पर हाई-ग्रेड फीवर और छाती में जकड़न की शिकायत वाले मरीज तेजी से सामने आए हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही से स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों पर ही चिकित्सकीय सलाह जरूरी मानी जा रही है।
किन लक्षणों पर डॉक्टरों की नजर
डॉक्टरों के मुताबिक बुखार का लंबे समय तक बना रहना, सूखी या बलगम वाली खांसी, सांस फूलना, कमजोरी, भूख कम लगना और छाती में भारीपन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मरीजों में एलर्जिक रिएक्शन के साथ सांस की नलियों में सूजन भी देखी जा रही है। इससे पुराने अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी वाले मरीजों को ज्यादा परेशानी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग शुरुआती चरण में घरेलू दवा लेकर इलाज टालते हैं। इससे संक्रमण बढ़ने और रिकवरी में देरी का जोखिम रहता है। यदि बुखार लगातार ऊंचा रहे या ऑक्सीजन से जुड़ी दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इसे मौसम में उतार-चढ़ाव, वायु गुणवत्ता में गिरावट और संक्रमण के मौसमी चक्र से जोड़कर देख रहे हैं। दिन-रात के तापमान में अंतर बढ़ने पर वायरल संक्रमण की संभावना बढ़ती है। धूल, धुआं और एलर्जी कारक तत्व भी फेफड़ों पर दबाव डालते हैं, जिससे सांस और बुखार वाले मरीजों की संख्या एक साथ बढ़ सकती है।
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के बाद लोग श्वसन संबंधी लक्षणों को तुरंत कोरोना से जोड़ देते हैं। हालांकि चिकित्सकीय जांच से ही यह स्पष्ट होता है कि मरीज को कोविड, वायरल फ्लू, एलर्जिक इंफ्लेमेशन या कोई अन्य संक्रमण है। इसलिए अनुमान के आधार पर दवा लेने के बजाय सही जांच कराना ज्यादा सुरक्षित है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से अस्थमा, सीओपीडी, डायबिटीज या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सतर्कता रखने की सलाह दी गई है। इन वर्गों में संक्रमण का असर तेज हो सकता है और रिकवरी में भी समय लग सकता है।
जो लोग भीड़भाड़ में लंबे समय तक रहते हैं या धूल-धुएं वाले माहौल में काम करते हैं, उन्हें मास्क, पर्याप्त पानी और नियमित स्वास्थ्य निगरानी पर ध्यान देना चाहिए। लगातार थकान, सांस में तकलीफ और तेज बुखार जैसे संकेत दिखें तो देरी नहीं करनी चाहिए।
रोकथाम के लिए व्यावहारिक सलाह
विशेषज्ञों ने साफ-सफाई, हाथ धोने की आदत, जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग और पर्याप्त नींद पर जोर दिया है। तेज बुखार की स्थिति में स्वयं एंटीबायोटिक शुरू न करने की सलाह दी गई है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बदलना या बंद करना भी नुकसानदायक हो सकता है।
घर में किसी सदस्य को बुखार या खांसी हो तो अलग तौलिया, बर्तन और व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना बेहतर रहता है। बच्चों और बुजुर्गों को संक्रमण से बचाने के लिए लक्षण वाले व्यक्ति का संपर्क सीमित करना उपयोगी माना गया है।
कुल मिलाकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का संदेश साफ है कि भोपाल में बढ़ते कोरोना जैसे लक्षणों को हल्के में लेने की गुंजाइश नहीं है। समय पर जांच, सही इलाज और बुनियादी सावधानियां अपनाकर गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।