मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अवैध शराब के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक फार्महाउस से कथित जहरीली शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ने का दावा किया है। यह फार्महाउस स्थानीय स्तर पर भाजपा नेता से जुड़ा बताया जा रहा है। शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस का कहना है कि यहां तैयार की जा रही शराब इतनी खतरनाक थी कि उसका सेवन करने वाले की मौत तक हो सकती थी।
मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है क्योंकि जांच में एक कांग्रेस नेता को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी नेता कार्रवाई के बाद से फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि फार्महाउस का उपयोग कब से हो रहा था और इस यूनिट से शराब की सप्लाई किन इलाकों में की जा रही थी।
छापे की कार्रवाई में क्या सामने आया
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, मौके पर ऐसी व्यवस्था मिली जो नियमित रूप से अवैध शराब तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। पुलिस ने उत्पादन और पैकिंग से जुड़े उपकरणों को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया शुरू की है। नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद शराब की वास्तविक रासायनिक प्रकृति और खतरे का स्तर स्पष्ट होगा।
अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की शुरुआती जांच में यह संकेत मिला कि मिश्रण मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। इसी आधार पर पुलिस ने इसे संभावित जहरीली शराब का मामला मानते हुए गंभीर धाराओं में जांच आगे बढ़ाई है।
राजनीतिक कनेक्शन की भी जांच
मामले में दो अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नाम सामने आने के बाद जांच की संवेदनशीलता बढ़ गई है। एक तरफ कार्रवाई जिस जगह हुई, वह भाजपा नेता से जुड़ी बताई जा रही है। दूसरी तरफ पुलिस ने कांग्रेस नेता को कथित रूप से पूरे नेटवर्क का संचालक माना है। ऐसे में जांच एजेंसियां संपत्ति के स्वामित्व, संचालन और वास्तविक नियंत्रण से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभी तक की जांच में आर्थिक लेनदेन, संपर्क श्रृंखला और सप्लाई चैन पर भी फोकस किया जा रहा है। जिन लोगों की भूमिका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फरार आरोपी की तलाश तेज
जांच अधिकारियों ने फरार बताए जा रहे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर दबिश शुरू कर दी है। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और स्थानीय संपर्कों के आधार पर संभावित ठिकानों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के बाद ही नेटवर्क की वास्तविक परतें खुलेंगी।
इसके साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि फैक्ट्री से तैयार माल बाजार में पहले से पहुंचा या नहीं। अगर सप्लाई हो चुकी है, तो संबंधित इलाकों में अलर्ट जारी कर रिकवरी और ट्रेसिंग अभियान चलाया जा सकता है। स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले को प्राथमिकता दी जा रही है।
अगले कदम और कानूनी स्थिति
पुलिस ने जब्त सामग्री को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेज दिया है और केस डायरी में सभी तकनीकी बिंदु दर्ज किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर धाराओं में संशोधन या नई धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। जिन व्यक्तियों की भूमिका संपत्ति उपलब्ध कराने, उत्पादन कराने या वितरण कराने में पाई जाएगी, उन पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई होगी।
फिलहाल जांच का केंद्र तीन बिंदुओं पर है—कथित जहरीली शराब की गुणवत्ता, नेटवर्क का संचालन और फरार आरोपी की गिरफ्तारी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत खुलासा किया जाएगा।