Indore Metro Project: मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। तमाम विरोध प्रदर्शनों, अदालती कार्यवाहियों और स्थानीय निवासियों की आपत्तियों के बावजूद, शहर के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अंडरग्राउंड (भूमिगत) मेट्रो स्टेशन बनाने का काम अब पूरी गति से प्रारंभ हो गया है।
विशेष रूप से मल्हारगंज स्थित ‘छोटा गणपति मंदिर’ स्टेशन, जो लंबे समय से विवादों का केंद्र बना हुआ था, वहां भी निर्माण कंपनी ने मोर्चा संभाल लिया है।
1. सात स्टेशनों का जाल: रीगल से एयरपोर्ट तक का सफर
इंदौर मेट्रो परियोजना के प्रथम चरण में 8.65 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (HCC) और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (TPL) के जॉइंट वेंचर को सौंपी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस कॉरिडोर के अंतर्गत कुल सात स्टेशन बनाए जाएंगे, जो शहर के हृदय स्थल को सीधे कनेक्टिविटी देंगे:
एयरपोर्ट और बीएसएफ/कालानी नगर के बीच का हिस्सा।
रामचंद्र नगर और बड़ा गणपति चौराहा।
छोटा गणपति मंदिर के सामने वाला क्षेत्र।
ऐतिहासिक राजवाड़ा।
रीगल चौराहा स्थित रानी सराय (पुलिस कंट्रोल रूम)।
2. छोटा गणपति मंदिर: विरोध और विकास के बीच का संघर्ष
इंदौर में मेट्रो का सबसे ज्यादा विरोध मल्हारगंज और छोटा गणपति मंदिर क्षेत्र में देखने को मिला। स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों ने अपनी दुकानों और मकानों के अधिग्रहण के डर से धरना, पुतला दहन और मानव श्रृंखला जैसे कई हथकंडे अपनाए। उनकी मांग थी कि स्टेशन का स्थान परिवर्तित किया जाए ताकि घनी आबादी वाले इस क्षेत्र के पुराने ढांचे सुरक्षित रहें।
हालाकि, मेट्रो कंपनी और प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी रूप से स्टेशन का स्थान बदलना संभव नहीं है। अब इस क्षेत्र को टीन के पतरों (B barricades) से घेर लिया गया है और भारी मशीनें पहुंच चुकी हैं। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि काम की शुरुआत में देरी जरूर हुई, लेकिन अब इसे समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
3. सांस्कृतिक तालमेल: ‘बजरबट्टू सम्मेलन’ और ‘गैर’ के लिए विशेष छूट
इंदौर की संस्कृति और विकास के बीच समन्वय का एक अनूठा उदाहरण भी यहाँ देखने को मिला है। रंगपंचमी की पूर्व संध्या पर आयोजित होने वाला प्रसिद्ध ‘बजरबट्टू सम्मेलन’ और उसके अगले दिन निकलने वाली पारंपरिक ‘गैर’ (होली जुलूस) के लिए मेट्रो कंपनी ने लचीला रुख अपनाया है।
आयोजकों (चांदू नेता, भूपेंद्र केसरी, अजय लाहोटी) और ठेकेदार एजेंसी के बीच हुई चर्चा में यह सहमति बनी है कि:
सम्मेलन के आयोजन के लिए मंदिर के सामने लगाए गए पतरे अस्थाई रूप से हटाए जाएंगे।
ताकि हास्य कवि सम्मेलन का मंच उसी पारंपरिक स्थान पर लग सके।
रंगपंचमी के जुलूस और गैर के गुजरने के बाद ही वापस बैरिकेडिंग की जाएगी। इस बार कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय किस अवतार में नजर आएंगे, इसे फिलहाल गुप्त रखा गया है।
4. पर्यावरण और विरासत की चिंता
मेट्रो का विरोध केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय आधार पर भी हो रहा है।
रानी सराय का मुद्दा: रीगल चौराहे पर स्थित रानी सराय क्षेत्र में दशकों पुराने विशाल पेड़ हैं, जो हजारों पक्षियों और दुर्लभ तोतों का रैन बसेरा हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि मेट्रो स्टेशन और पार्किंग के नाम पर इन पेड़ों की कटाई से शहर का एक जीवंत ईको-सिस्टम खत्म हो जाएगा।
संस्थाओं की मांग: कई सामाजिक संस्थाओं का तर्क है कि मेट्रो लाइन को शहर के मुख्य घनी आबादी वाले हिस्सों के बजाय ‘आउट एरिया’ से ले जाना चाहिए था ताकि शहर की हरियाली और पुरानी पहचान बची रहे।
5. देश के 9 शहरों में चल रहा है काम: इंदौर इकलौता विरोध केंद्र?
एक दिलचस्प जानकारी यह भी सामने आई है कि वर्तमान में इंदौर सहित देश के कुल 9 प्रमुख शहरों में अंडरग्राउंड मेट्रो का काम चल रहा है। इनमें लखनऊ, मेरठ, दिल्ली, कानपुर, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, आगरा और पुणे शामिल हैं। अधिकारियों का दावा है कि अन्य शहरों के मुकाबले इंदौर में स्थानीय विरोध अधिक तीव्र रहा है, जबकि मेट्रो भविष्य की परिवहन व्यवस्था के लिए अपरिहार्य है।
6. लागत और समय सीमा (प्रोजेक्ट एट ए ग्लेंस)
इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग 2,550 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। आधुनिक टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का उपयोग करके शहर के नीचे सुरंग बनाई जाएगी। कंपनी ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
निष्कर्ष: इंदौर मेट्रो का ‘अंडरग्राउंड फेज’ केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि शहर के आधुनिक भविष्य और उसकी प्राचीन विरासत के बीच का एक सेतु है। जहाँ प्रशासन विकास की रफ्तार बढ़ाने पर आमादा है, वहीं जनता अपनी यादों और व्यापार को बचाने की जद्दोजहद में है। फिलहाल, मेट्रो के पहिये अगले स्टेशन की ओर बढ़ चुके हैं।