शहर के बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने की लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पहले एक ठेकेदार द्वारा काम अधूरा छोड़ देने और अदालत की कड़ी टिप्पणी के बाद मामला अटक गया था, लेकिन अब नगर निगम को नए ठेकेदार मिलते नजर आ रहे हैं। बीआरटीएस की रैलिंग और बस स्टॉप हटाने के लिए निकाले गए दो अलग-अलग टेंडरों में कुल 15 एजेंसियों ने रुचि दिखाई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अटकी हुई कार्रवाई अब तेजी पकड़ सकती है।
यह पूरा मामला इसलिए भी संवेदनशील बन गया था क्योंकि कॉरिडोर को समय पर न हटाने को लेकर कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को फटकार लगाई थी। अदालत की सख्ती के बाद निगम प्रशासन ने दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की। इस बार पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से निविदाएं जारी की गईं, ताकि पिछली बार की तरह काम बीच में न रुके। निगम अधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त संख्या में एजेंसियों के आगे आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और काम तय समय में पूरा कराया जा सकेगा।
नगर निगम की जनकार्य समिति के प्रभारी राजेंद्र राठौर ने जानकारी दी कि रैलिंग तोड़ने और बस स्टॉप हटाने के लिए अलग-अलग टेंडर आमंत्रित किए गए थे। रैलिंग हटाने का टेंडर स्क्वेयर मीटर के आधार पर जारी किया गया, जिसमें पांच ठेकेदारों ने दिलचस्पी दिखाई है। वहीं बस स्टॉप तोड़ने के लिए दस एजेंसियों ने आवेदन किया है। राठौर के अनुसार सोमवार को संबंधित फाइलें अधिकारियों के सामने रखी जाएंगी और बैठक के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि काम किसे सौंपा जाए।
गौरतलब है कि इससे पहले बीआरटीएस की रैलिंग हटाने का काम शुरू तो हुआ था, लेकिन ठेकेदार ने बीच में ही काम बंद कर दिया था। परिणामस्वरूप शहर के कई हिस्सों में आधी-अधूरी रैलिंग और पुराने बस स्टॉप अब भी मौजूद हैं, जिससे यातायात और सौंदर्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। अब नई निविदा प्रक्रिया के बाद नगर निगम अदालत के समक्ष अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और यह बताएगा कि हटाने की कार्रवाई किस चरण में है।
रैलिंग और बस स्टॉप पूरी तरह हट जाने के बाद निगम की योजना कॉरिडोर की जगह नए डिवाइडर बनाने की है। इसका उद्देश्य ट्रैफिक को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। प्रशासन का दावा है कि डिवाइडर निर्माण के बाद सड़क की चौड़ाई का बेहतर उपयोग होगा और जाम की स्थिति में सुधार आएगा। कुल मिलाकर, बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने की यह प्रक्रिया शहर के यातायात ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।